झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले आगामी चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। महागठबंधन में झारखंड मुक्ति मोर्चा के बाद दूसरी सबसे बड़ी हिस्सेदार कांग्रेस ने इस बार एक सीट पर अपना मजबूत दावा ठोक दिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की मुलाकात के बाद पार्टी खेमे में उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं, जिसके बाद टिकट के दावेदारों ने दिल्ली से लेकर रांची तक दौड़ लगानी शुरू कर दी है।
कांग्रेस की ओर से राज्यसभा सीट पर दावेदारी को लेकर झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू, तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की।
मुलाकात के बाद कांग्रेस नेताओं में उत्साह है क्योंकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनकी मांग को गंभीरता से लेने की बात कही है। सीएम ने संकेत दिया है कि अंतिम फैसला महागठबंधन के सभी सहयोगी दलों (JMM, कांग्रेस, राजद और माले) से विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा।
राज्यसभा सीट मिलने की उम्मीदों के बीच कांग्रेस के भीतर भी आंतरिक खींचतान और लॉबिंग शुरू हो चुकी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, रेस में कई बड़े और अनुभवी चेहरे शामिल हैं:
- धीरज साहू
- राजेश ठाकुर
- प्रदीप बालमुचू
- फुरकान अंसारी
झारखंड विधानसभा के मौजूदा गणित को देखें तो महागठबंधन दोनों ही सीटों को आसानी से अपने पाले में कर सकता है। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोट की आवश्यकता होती है।
| दल / गठबंधन | विधायकों की संख्या |
| झारखंड मुक्ति मोर्चा | 34 |
| कांग्रेस | 16 |
| राष्ट्रीय जनता दल | 04 |
| भाकपा माले | 02 |
| 🔴 महागठबंधन | 56 विधायक |
| 🔵 भाजपा व सहयोगी दल | 24 विधायक |
महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं, जो दो सीटों को जिताने के लिए बिल्कुल पर्याप्त हैं। इसी आंकड़े के दम पर कांग्रेस का तर्क है कि झामुमो एक सीट अपने पास रखे और दूसरी सीट कांग्रेस को सौंपे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हेमंत सोरेन का यह फैसला न केवल राज्यसभा चुनाव की दिशा तय करेगा, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले महागठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन और आपसी तालमेल को भी प्रभावित करेगा। अब देखना यह है कि झामुमो का शीर्ष नेतृत्व कांग्रेस की इस मांग पर कब तक अपनी अंतिम मुहर लगाता है।
