अमेरिका के नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस (J.D. Vance) के एक हालिया बयान ने अमेरिकी राजनीतिक और कूटनीतिक गलियारों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। जे.डी. वेंस द्वारा दिए गए बयान—“हम पाकिस्तान से प्यार करते हैं”—के बाद अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में एक तीखी बहस छिड़ गई है। अमेरिका के ही दो दिग्गज रिपब्लिकन सीनेटरों ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए पाकिस्तान और कतर की वैश्विक भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और दोनों देशों के आतंकवाद से जुड़े पुराने काले रिकॉर्ड की याद दिलाई है।
सीनेटर रिक स्कॉट का हमला: आतंकवाद को संरक्षण देना दोनों देशों का इतिहास
फ्लोरिडा से प्रभावशाली रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट ने उपराष्ट्रपति के बयान के विपरीत जाकर पाकिस्तान और कतर की नीतियों की कड़े शब्दों में आलोचना की। उन्होंने कहा:
- पाकिस्तान और कतर पर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से वित्तीय व रणनीतिक संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं।
- इन दोनों देशों की प्राथमिकता कभी भी दक्षिण एशिया या मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में स्थायी शांति स्थापित करने की नहीं रही, बल्कि इन्होंने हमेशा शांति प्रक्रिया की आड़ में अपने संकीर्ण रणनीतिक हितों को साधने का काम किया है।
सीनेटर टिम शीही ने याद दिलाया ‘ऐबटाबाद’ और ओसामा कनेक्शन
वहीं, मोंटाना से रिपब्लिकन सीनेटर टिम शीही ने इस विवाद में सबसे संवेदनशील मुद्दा उठाते हुए पाकिस्तान को सीधे कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने दुनिया के सबसे खूंखार अल-कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान के ऐबटाबाद में सुरक्षित पाए जाने और मारे जाने की ऐतिहासिक घटना का उल्लेख किया। सीनेटर शीही ने दोटूक कहा:
“ओसामा बिन लादेन को अपने देश में छिपाने वाले पाकिस्तान की दोहरी भूमिका को इतनी आसानी से भुलाया नहीं जा सकता। यदि अमेरिकी प्रशासन किसी भी क्षेत्रीय मध्यस्थता या शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान और कतर जैसे अविश्वसनीय देशों को अचानक महत्व देने लगेगा, तो यह हमारे पारंपरिक और भरोसेमंद सहयोगियों—संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इजरायल और सऊदी अरब का अपमान होगा। वॉशिंगटन को अपने पुराने मित्रों को समान या उससे अधिक महत्व देना ही चाहिए।”
जे.डी. वेंस के बयान ने क्यों बढ़ाई चिंता?
दरअसल, अमेरिकी राजनीति के जानकारों का कहना है कि जे.डी. वेंस का यह बयान इसलिए भी विवादों में है क्योंकि अमेरिका ने खुद वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की टेरर फंडिंग को लेकर हमेशा कड़ा रुख अपनाया है। आलोचकों और रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जो बाइडन प्रशासन के बाद अब नई अमेरिकी सरकार को पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाते समय उसके अतीत, आतंकवाद प्रायोजित करने के इतिहास और भारत विरोधी गतिविधियों को कतई नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
वॉशिंगटन की दक्षिण और पश्चिम एशिया नीति पर नई बहस
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर अमेरिका की दक्षिण एशिया (भारत-पाकिस्तान) और पश्चिम एशिया (इजरायल-खाड़ी देश) नीति को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है। अमेरिकी सीनेटरों के इस बगावती और सख्त रुख के बाद अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में वॉशिंगटन की कूटनीतिक प्राथमिकताओं और विदेश नीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलता है या फिर जे.डी. वेंस का यह बयान केवल एक शिष्टाचार तक ही सीमित रहेगा।
