बंगाल में सियासी भूचाल: तृणमूल में अंतर्कलह के बीच फिरहाद हकीम का कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा

"टीएमसी में बड़ी दरार: फिरहाद हकीम के इस्तीफे से कोलकाता नगर निगम में संकट, बंगाल की राजनीति में गरमाया माहौल।"

Johar News Times
4 Min Read

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर मची अंतर्कलह और उथल-पुथल थमने का नाम नहीं ले रही है। शुक्रवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले फिरहाद हकीम ने कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया। दोपहर में कोलकाता नगर निगम मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने खुद अपने इस बड़े फैसले की घोषणा की।

गौरतलब है कि बंगाल में टीएमसी के लिए यह लगातार दूसरा बड़ा झटका है। बीते गुरुवार को ही बिधाननगर नगर निगम की मेयर कृष्णा चक्रवर्ती ने भी अपने पद से इस्तीफा दिया था।

भावुक हुए हकीम, बोले- ‘कुर्सी की मर्यादा के लिए दे रहा हूँ इस्तीफा’

साल 2018 से कोलकाता के मेयर की जिम्मेदारी संभाल रहे फिरहाद हकीम इस्तीफे की घोषणा करते हुए काफी भावुक नजर आए। उन्होंने इस ऐतिहासिक पद की गरिमा का जिक्र करते हुए कहा:

“जिस मेयर की कुर्सी पर मैं बैठा था, उसका एक गौरवशाली इतिहास रहा है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे महान व्यक्तित्व इस पद पर आसीन रह चुके हैं। बंगाल में सत्ता परिवर्तन (भाजपा सरकार बनने) के बाद से निगम के प्रशासनिक कार्यों में लगातार कठिनाइयाँ आ रही थीं। बदली हुई परिस्थितियों में, मैं इस प्रतिष्ठित कुर्सी की मर्यादा और गरिमा को बनाए रखने में खुद को असमर्थ पा रहा था। इसीलिए भारी मन से बाध्य होकर इस्तीफा दे रहा हूँ।”

उन्होंने कोलकाता जैसे महत्वपूर्ण शहर की सेवा का मौका देने के लिए अपनी नेता ममता बनर्जी का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।

कुणाल घोष ने पहले ही दिए थे संकेत

फिरहाद हकीम का इस्तीफा कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है। बुधवार को ही तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता और विधायक कुणाल घोष ने यह खुलासा कर दिया था कि हकीम ने टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी से मेयर पद छोड़ने की दोबारा अनुमति मांगी थी, जिसे ममता बनर्जी ने स्वीकार कर लिया था।

घोष के मुताबिक, राज्य में सत्ता बदलने के बाद से ही कोलकाता नगर निगम के कामकाज में बाधाएं आ रही थीं, जिसके चलते हकीम पहले भी पद छोड़ना चाहते थे, लेकिन तब ममता बनर्जी ने उन्हें रोक दिया था।

कोलकाता नगर निगम पर साल 2010 से ही तृणमूल कांग्रेस का एकछत्र नियंत्रण रहा है। टीएमसी के सबसे प्रभावशाली अल्पसंख्यक चेहरों में शुमार फिरहाद हकीम ममता बनर्जी की पूर्ववर्ती सरकार में 15 वर्षों तक कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। हाल के हफ्तों में केएमसी के कई पार्षदों के लगातार इस्तीफों और इस नए घटनाक्रम ने टीएमसी के भीतर की अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि कोलकाता का अगला मेयर कौन बनेगा।

हाईलाइट्स:

  • दो दिन के भीतर टीएमसी शासित दो प्रमुख नगर निगमों (बिधाननगर और कोलकाता) के मेयरों ने पद छोड़ा।
  • बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक कार्यों में आ रही बाधाओं को बताया मुख्य कारण।
  • 2018 से कोलकाता के मेयर थे फिरहाद हकीम; ममता सरकार में 15 साल रहे मंत्री।
Share This Article