झारखंड आंदोलनकारियों के लिए बड़ी खबर: समान सम्मान पेंशन के प्रस्ताव पर कल कैबिनेट की मुहर संभव, नौकरियों में 10% आरक्षण की भी उम्मीद

"वित्त मंत्री के आश्वासन के बाद उम्मीदें तेज, क्या कल आंदोलनकारियों के संघर्ष को मिलेगा उनका असली अधिकार?"

Johar News Times
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झारखंड के गठन के लिए लंबा संघर्ष करने वाले आंदोलनकारियों के लिए सोमवार का दिन बेहद ऐतिहासिक हो सकता है। राज्य के आंदोलनकारियों को समान रूप से सम्मान पेंशन, विभिन्न सरकारी सुविधाएं और अन्य लाभ देने के प्रस्ताव पर सोमवार को होने वाली राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में महत्वपूर्ण फैसला लिया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, इस बहुप्रतीक्षित प्रस्ताव को कैबिनेट के एजेंडे में शामिल किए जाने की पूरी संभावना है।

वित्त मंत्री ने दिया था समान पेंशन का भरोसा

हाल ही में वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने अपने आवास पर झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ अहम बैठक की थी। इस बैठक के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री की सहमति का हवाला देते हुए आश्वस्त किया था कि सभी आंदोलनकारियों को बिना किसी भेदभाव के समान सम्मान पेंशन देने का प्रस्ताव आगामी कैबिनेट की बैठक में लाया जाएगा।

आश्रितों को सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण की पहल

पेंशन के अलावा, इस बैठक में आंदोलनकारियों के बच्चों और उनके आश्रितों के भविष्य को लेकर भी बड़ी चर्चा हुई थी। वित्त मंत्री ने मोर्चा के प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया था कि आंदोलनकारियों के आश्रितों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने की दिशा में सरकार जल्द ही ठोस पहल करेगी।

आंदोलनकारियों की मांग: मिले स्वतंत्रता सेनानियों जैसा राजकीय सम्मान

मोर्चा के प्रतिनिधियों ने सरकार के समक्ष अपनी व्यथा रखते हुए कहा था कि झारखंड राज्य का निर्माण एक लंबे और कड़े संघर्ष तथा अनेक वीरों की शहादतों के बाद हुआ है। इसके बावजूद, आज भी कई आंदोलनकारी और उनके परिवार सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्तर पर कड़ा संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि उन्हें:

  • देश के स्वतंत्रता सेनानियों की तर्ज पर राजकीय सम्मान दिया जाए।
  • समाज में एक विशिष्ट और अलग पहचान मिले।
  • जीवन यापन के लिए एक सम्मानजनक और समान मासिक पेंशन राशि सुनिश्चित की जाए।

कल होने वाली कैबिनेट बैठक पर टिकीं सबकी निगाहें

कैबिनेट के इस संभावित फैसले को लेकर राज्यभर के हजारों झारखंड आंदोलनकारियों और उनके परिवारों में उम्मीद की किरण जगी है। सभी की नजरें सोमवार को धुर्वा स्थित सचिवालय में होने वाली कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं, जहां इस ऐतिहासिक और संवेदनशील नीतिगत प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लग सकती है।

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