सावधान! कहीं बहरेपन का शिकार तो नहीं बना रहे आपके ईयरफोन? WHO ने दी चेतावनी, जानें बचने के उपाय

आपकी एक छोटी सी लापरवाही कानों को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकती है। आज ही से अपनी आदतें बदलें और सुरक्षित तरीके से गैजेट्स का इस्तेमाल करें।

Johar News Times
4 Min Read

आज के दौर में टेक्नोलॉजी हमारी जरूरत भी है और मजबूरी भी। ईयरफोन या हेडफोन इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। सुबह की वॉक हो, मेट्रो या बस का सफर, कैफे में बैठना हो या ऑफिस की मीटिंग—हर जगह लोग कानों में ईयरफोन लगाए नजर आते हैं। इससे आसपास के लोगों को भले परेशानी न हो, लेकिन आपका यह शौक आपकी सुनने की क्षमता को हमेशा के लिए छीन सकता है।

एक अरब युवाओं पर बहरेपन का खतरा: WHO

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार, अनसेफ लिसनिंग (असुरक्षित तरीके से सुनने) की आदतों के कारण दुनिया भर में करीब 1 अरब युवा सुनने की क्षमता खोने (बहरेपन) के जोखिम में हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह ईयरफोन की तेज आवाज और उसका लंबे समय तक इस्तेमाल है।

कानों में कैसे पहुंचता है नुकसान?

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब हम तेज़ आवाज़ में ईयरफोन पर कुछ सुनते हैं, तो कानों के अंदर यह प्रक्रिया होती है:

  • सूक्ष्म कोशिकाओं (Hair Cells) का डैमेज होना: तेज़ आवाज़ की ध्वनि तरंगें कान के पर्दे में कंपन पैदा करती हैं। यह कंपन अंदरूनी कान के ‘कोक्लिया’ तक पहुंचता है, जहां हजारों सूक्ष्म हेयर सेल्स होती हैं। तेज आवाज इन कोशिकाओं पर दबाव डालती है, जिससे ये स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं।
  • टिनिटस (Tinnitus) की बीमारी: कई लोगों को कानों में लगातार घंटी बजने जैसी आवाज़ सुनाई देने लगती है, जिसे मेडिकल भाषा में टिनिटस कहते हैं।
  • हाइपरएक्यूसिस (Hyperacusis): इस स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को सामान्य आवाज़ें भी असहनीय और दर्दनाक लगने लगती हैं।
  • अन्य समस्याएं: लंबे समय तक ईयरफोन लगाने से चक्कर आना, कान में तेज दर्द, अत्यधिक ईयरवैक्स (खूंट) जमा होना और बार-बार कान में इंफेक्शन होने का खतरा रहता है।

बैक्टीरिया का भी है खतरा: ईयरफोन को अलग-अलग जगहों पर रखने से उन पर बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं। जब हम इन्हें दूसरों के साथ शेयर करते हैं, तो कान के इंफेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

ईयरफोन के खतरे से कैसे बचें? एक्सपर्ट्स की सलाह

अगर आपकी नौकरी या लाइफस्टाइल में ईयरफोन का इस्तेमाल जरूरी है, तो इन बातों का खास ख्याल रखें:

  1. 60/60 का नियम अपनाएं: कभी भी वॉल्यूम को 60% से ऊपर न करें और लगातार 60 मिनट से ज्यादा ईयरफोन का इस्तेमाल न करें। बीच-बीच में कानों को आराम दें।
  2. ओवर-द-ईयर हेडफोन चुनें: कानों के अंदर ठूंसे जाने वाले ईयरबड्स की तुलना में ओवर-द-ईयर (कान के ऊपर आने वाले) हेडफोन बेहतर होते हैं।
  3. नॉइज-कैंसिलिंग (Noise-Canceling) का इस्तेमाल: नॉइज-कैंसिलिंग हेडफोन बाहरी शोर को ब्लॉक कर देते हैं, जिससे आपको गाने या कॉल सुनने के लिए वॉल्यूम बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ती।
  4. सफर के दौरान बचें: बस या ट्रेन के सफर के दौरान पहले से ही बहुत शोर होता है। ऐसे में लोग ईयरफोन की आवाज और तेज कर देते हैं, जो कानों के लिए बेहद घातक है।
  5. सफाई है जरूरी: अपने ईयरफोन या बड्स को नियमित रूप से सैनिटाइज/साफ करते रहें और इसे किसी के साथ शेयर न करें।

आपकी एक छोटी सी लापरवाही कानों को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकती है। आज ही से अपनी आदतें बदलें और सुरक्षित तरीके से गैजेट्स का इस्तेमाल करें।

Share This Article