मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े सियासी उलटफेर की अटकलें तेज हो गई हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को मुंबई स्थित अपने आवास ‘मातोश्री’ में पार्टी सांसदों की आपात बैठक बुलाई, लेकिन बैठक से पहले ही कई सांसदों के अनुपस्थित रहने की खबर ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है। जानकारी के मुताबिक, उद्धव ठाकरे ने दिल्ली में मौजूद सभी सांसदों को तत्काल मुंबई पहुंचने का निर्देश दिया था। यह बैठक आगामी संसद सत्र और बदलते राजनीतिक हालात को लेकर रणनीति तय करने के लिए बुलाई गई थी। हालांकि शिरडी से सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे का मोबाइल फोन सुबह से बंद बताया जा रहा है और उनका कोई स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। सूत्रों के अनुसार, वह पिछले कुछ दिनों से परिवार के साथ बाहर हैं। उनके निजी सहायक से भी संपर्क नहीं हो सका है।
वहीं, सांसद संजय जाधव और नागेश पाटिल अष्टिकर ने भी निजी कारणों का हवाला देते हुए बैठक में शामिल नहीं होने की जानकारी पार्टी नेतृत्व को दे दी है। ऐसे में बैठक में सांसदों की उपस्थिति को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। इस घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चाएं भी तेज हैं। सत्तापक्ष और शिंदे गुट के नेताओं की ओर से लगातार दावा किया जा रहा है कि उद्धव गुट के कई सांसद उनके संपर्क में हैं। यही वजह मानी जा रही है कि उद्धव ठाकरे अपने सांसदों को एकजुट रखने के लिए सक्रिय हो गए हैं।
लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के नौ सांसद हैं। इनमें संजय देशमुख, नागेश पाटिल, संजय जाधव, राजाभाऊ वाजे, अरविंद सावंत, अनिल देसाई, संजय दीना पाटिल, भाऊसाहेब वाकचौरे और ओमराजे निंबालकर शामिल हैं। ऐसे में बैठक में सांसदों की मौजूदगी और अनुपस्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि कुछ सांसद पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाते हैं, तो इसका असर न केवल शिवसेना (यूबीटी) की ताकत पर पड़ेगा, बल्कि लोकसभा में एनडीए के संख्या बल को लेकर भी नई चर्चाएं शुरू हो सकती हैं। फिलहाल मातोश्री में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और महाराष्ट्र की राजनीति पर सबकी नजर बनी हुई है।
