नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भविष्य और उसके कांग्रेस में संभावित विलय को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बड़ा बयान सामने आया है। गहलोत ने कहा है कि कांग्रेस से अलग होकर बनी पार्टियों को फिर से कांग्रेस में शामिल होने पर विचार करना चाहिए और राहुल गांधी को विपक्ष का नेता स्वीकार करना चाहिए।
टीएमसी का नाम लिए बिना दिया संकेत
अशोक गहलोत ने सीधे तौर पर टीएमसी का नाम नहीं लिया, लेकिन शिवसेना नेता संजय राउत के उस सुझाव का समर्थन किया, जिसमें कांग्रेस से अलग हुई पार्टियों के एकजुट होने की बात कही गई थी। गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई में विपक्षी दलों को एक मंच पर आना चाहिए और पूरे देश में यह स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि इंडिया गठबंधन के नेता राहुल गांधी हैं।
विलय की अटकलों के बीच आया बयान
हाल के दिनों में ऐसी चर्चाएं तेज हुई थीं कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार और पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष के बीच कांग्रेस नेतृत्व ने ममता बनर्जी को कांग्रेस में विलय और पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का प्रस्ताव दिया है। हालांकि टीएमसी ने इन दावों का खंडन किया था।
‘कांग्रेस से अलग हुए दलों को सोचना चाहिए’
गहलोत ने कहा कि समाजवादी पार्टी, सीपीआई, सीपीएम और शिवसेना जैसी पार्टियां अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि से आती हैं, लेकिन जो दल कांग्रेस से अलग होकर बने हैं, उन्हें वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए विपक्षी एकता जरूरी है।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी चर्चा
अशोक गहलोत का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कांग्रेस के किसी बड़े और वरिष्ठ नेता ने पहली बार सार्वजनिक रूप से कांग्रेस से अलग हुए दलों के विलय की बात कही है। अब राजनीतिक नजरें टीएमसी और ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं, क्योंकि इस बयान के बाद विपक्षी राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।
