नई दिल्ली/कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव के इस्तीफे और कथित बागी सांसदों की गतिविधियों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। जादवपुर से सांसद सयानी घोष का नाम भी उन नेताओं में शामिल होने की चर्चा है, जो कथित तौर पर अलग संसदीय व्यवस्था की मांग से जुड़े हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
20 सांसदों के समर्थन का दावा, बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के हवाले से दावा किया गया है कि पार्टी के करीब 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता देने और एनडीए को समर्थन देने की इच्छा जताई है। इस दावे के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। हालांकि पार्टी नेतृत्व और कई सांसदों के रुख को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
कौन हैं सयानी घोष, जिनका नाम बागी सांसदों की चर्चाओं में आया?
सयानी घोष बंगाल की चर्चित अभिनेत्री, गायिका और राजनेता हैं। वह वर्तमान में जादवपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं और टीएमसी के युवा चेहरों में उनकी गिनती होती है। राजनीति में आने से पहले उन्होंने मनोरंजन जगत में अपनी पहचान बनाई थी। बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान एक चुनावी गीत को लेकर हुए विवाद के बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आई थीं। अब कथित बागी सांसदों की सूची में उनका नाम सामने आने से राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं।
सुष्मिता देव के इस्तीफे से बढ़ीं अटकलें
राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। वह इस सप्ताह पार्टी छोड़ने वाली दूसरी राज्यसभा सांसद बताई जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार उनके भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की चर्चा है। इन अटकलों को उस समय और बल मिला जब इस्तीफे के बाद उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात की। हालांकि उन्होंने अब तक अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

2021 में कांग्रेस छोड़कर टीएमसी में हुई थीं शामिल
53 वर्षीय सुष्मिता देव ने वर्ष 2021 में कांग्रेस छोड़कर टीएमसी का दामन थामा था। इसके बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया और पूर्वोत्तर भारत में पार्टी के विस्तार की जिम्मेदारी सौंपी गई। इससे पहले वह कांग्रेस की महिला इकाई की राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुकी हैं और असम के सिलचर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं। उनके पिता संतोष मोहन देव कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री थे।
ममता और अभिषेक बनर्जी के सामने नई चुनौती
टीएमसी पहले से ही संगठन और संसदीय स्तर पर असंतोष की खबरों का सामना कर रही है। ऐसे में प्रभावशाली नेताओं के इस्तीफे और सांसदों के कथित असंतोष ने पार्टी नेतृत्व, विशेषकर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। हाल के दिनों में राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय के इस्तीफे की चर्चा भी सुर्खियों में रही है। लगातार सामने आ रहे इस्तीफों, असंतोष और बगावत की खबरों ने टीएमसी के भीतर जारी संकट को और गहरा कर दिया है। हालांकि पार्टी की ओर से कई दावों पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है और कई मामलों में पुष्टि का इंतजार है।
