धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की शहादत दिवस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने किया नमन, उलगुलान की विरासत को बताया जनस्वाभिमान की प्रेरणा

धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की शहादत दिवस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने किया नमन, उलगुलान की विरासत को बताया जनस्वाभिमान की प्रेरणा

Johar News Times
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रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके संघर्ष, बलिदान और जनजागरण की विरासत को याद किया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि भगवान बिरसा मुंडा उलगुलान की चेतना, संघर्ष की मशाल और जन-जन के स्वाभिमान के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने समाज को यह सीख दी कि अपनी पहचान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष ही सबसे बड़ी शक्ति है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि धरती आबा का जीवन आदिवासी समाज ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका त्याग और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को अपने अधिकारों, अस्मिता और सामाजिक न्याय के लिए जागरूक रहने की प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने “जय बिरसा” का उद्घोष करते हुए लोगों से उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

भगवान बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को उलीहातू में हुआ था। उन्होंने ब्रिटिश शासन और जमींदारी व्यवस्था के खिलाफ आदिवासी समाज को संगठित कर ऐतिहासिक ‘उलगुलान’ आंदोलन का नेतृत्व किया था। जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए उनका संघर्ष भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है।

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भी धरती आबा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बिरसा मुंडा का जीवन साहस, आत्मसम्मान और सामाजिक न्याय के मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा द्वारा दिखाया गया मार्ग आज भी समाज को एकजुटता, संघर्ष और अधिकारों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देता है।

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