मुंबई: ईरान-इजरायल तनाव से शेयर बाजार में भूचाल, सेंसेक्स 800 अंक टूटा, निवेशकों में मची बेचैनी

मुंबई: ईरान-इजरायल तनाव से शेयर बाजार में भूचाल, सेंसेक्स 800 अंक टूटा, निवेशकों में मची बेचैनी

Johar News Times
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पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स 800 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी भी 23,100 के नीचे फिसल गया। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।

खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 74,243 अंकों के मुकाबले करीब 822 अंक गिरकर 73,421 पर खुला। कारोबार के शुरुआती मिनटों में यह और फिसलकर 73,318 अंक तक पहुंच गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी-50 भी 286 अंक टूटकर 23,080 के स्तर पर खुला। शुरुआती गिरावट के बाद कुछ खरीदारी जरूर लौटी, लेकिन दोनों प्रमुख सूचकांक पूरे समय लाल निशान में कारोबार करते रहे।

आईटी, बैंकिंग और ऑटो शेयरों में बिकवाली

बाजार में सबसे अधिक दबाव आईटी, बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट सेक्टर पर रहा। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, महिंद्रा एंड महिंद्रा और एटरनल जैसे बड़े शेयरों में 1 से 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप शेयरों में अशोक लेलैंड, मुथूट फाइनेंस, गोदरेज प्रॉपर्टीज और यूपीएल भी दबाव में रहे। अधिकांश सेक्टोरल इंडेक्स नुकसान के साथ कारोबार करते नजर आए।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बना बड़ी चिंता

विशेषज्ञों के अनुसार गिरावट की सबसे बड़ी वजह ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ी चिंता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 4 प्रतिशत बढ़कर 96 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 94 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित तेल पर काफी निर्भर है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर महंगाई, व्यापार संतुलन और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है।

एशियाई बाजारों में भी दिखी कमजोरी
भारतीय बाजार से पहले एशियाई शेयर बाजारों में भी भारी दबाव देखा गया। जापान का निक्केई सूचकांक करीब 5 प्रतिशत तक लुढ़क गया, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक भी भारी गिरावट के साथ कारोबार करते रहे। इन कमजोर वैश्विक संकेतों ने घरेलू निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।

आगे क्या रहेगा बाजार का रुख?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर ईरान-इजरायल संघर्ष, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है या तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है।

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