नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में लगातार दूसरी बार प्रमुख ब्याज दरों को यथावत रखने का फैसला किया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसलों की घोषणा करते हुए बताया कि समिति ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का निर्णय लिया है। साथ ही नीतिगत रुख (पॉलिसी स्टांस) को भी तटस्थ बनाए रखा गया है।
आरबीआई ने स्थायी जमा सुविधा (एसडीएफ) की दर 5 प्रतिशत तथा सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) और बैंक दर 5.50 प्रतिशत पर यथावत रखी है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में ब्याज दरों में बदलाव की आवश्यकता नहीं है। हालांकि आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर (जीडीपी ग्रोथ) के अनुमान को 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। बैंक ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और जलवायु परिवर्तन को अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख जोखिम बताया है।
महंगाई को लेकर भी केंद्रीय बैंक ने सतर्क रुख अपनाया है। आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा मुद्रास्फीति (इन्फ्लेशन) का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है। बैंक का कहना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों और उत्पादन लागत में वृद्धि से आने वाले महीनों में महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है, हालांकि यह अभी भी निर्धारित सीमा के भीतर रहने की उम्मीद है। रुपये की विनिमय दर पर आरबीआई गवर्नर ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक किसी विशेष स्तर या दायरे को लक्ष्य नहीं बनाता, बल्कि विनिमय दर को बाजार की शक्तियों के आधार पर तय होने देता है।
विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए आरबीआई ने 15, 30 और 40 वर्ष की अवधि वाली सरकारी प्रतिभूतियां जारी करने की घोषणा की है। इसके अलावा सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश से जुड़े कई प्रतिबंधों को हटाने का भी निर्णय लिया गया है। साथ ही अनिवासी भारतीयों (एनआरआई), भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (ओसीआई) और अन्य पात्र विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय इक्विटी बाजार में निवेश के अवसरों का विस्तार किया गया है। केंद्रीय बैंक के इन फैसलों को आर्थिक स्थिरता बनाए रखने, विदेशी निवेश आकर्षित करने और महंगाई पर नियंत्रण रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
