अगर आप अपने शरीर पर उभरने वाले नए तिलों या मसों को आम समझकर छोड़ रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। यह स्किन कैंसर (त्वचा कैंसर) के सबसे घातक रूप ‘मेलानोमा’ (Melanoma) का संकेत हो सकता है। कैंसर रिसर्च यूके (Cancer Research UK) की हालिया रिपोर्ट ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले यूके में साल 2022 में 20 हजार से ज्यादा मेलानोमा के मामले सामने आए, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। अगर यही रफ्तार रही, तो साल 2040 तक हर साल करीब 26,500 लोग इस खतरनाक बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।
क्या है मेलानोमा और यह क्यों है इतना खतरनाक?
मेलानोमा त्वचा की उन कोशिकाओं (Cells) में पनपता है जो मेलेनिन (Melanin) बनाती हैं। मेलेनिन वही तत्व है जो हमारी त्वचा को रंग देता है।
क्यों है यह घातक? स्किन कैंसर का यह रूप इसलिए सबसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है क्योंकि यह बहुत तेजी से शरीर के अन्य अंगों और हिस्सों में फैल जाता है।
पुरुष या महिला: कौन है सबसे ज्यादा निशाने पर?
रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, आने वाले समय में पुरुषों में मेलानोमा के मामलों में 23% और महिलाओं में 26% तक की बढ़ोतरी होने की आशंका है।
- युवा महिलाएं: 55 साल से कम उम्र की महिलाओं में यह बीमारी पुरुषों की तुलना में अधिक देखी जा रही है। इसकी मुख्य वजह धूप में ज्यादा समय बिताना और टैनिंग (Tanning) की आदत है।
- बुजुर्ग पुरुष: बढ़ती उम्र के साथ पुरुषों में इसका खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि वे लंबे समय तक धूप के संपर्क में रहते हैं। पिछले 10 सालों में 80 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों में इसके मामलों में 57% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
असली विलेन: सूरज की UV किरणें और सनबेड
इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) की ग्लोबल स्टडी के मुताबिक:
- साल 2022 में दुनियाभर में मेलानोमा के 3.32 लाख मामले दर्ज किए गए।
- इनमें से 80% से ज्यादा (करीब 2.67 लाख) मामले सीधे तौर पर अल्ट्रावॉयलेट (UV) रेडिएशन के कारण हुए।
- यूके में लगभग 90% मामले सूरज की तेज किरणों और सनबेड (Sunbeds) के इस्तेमाल से जुड़े हैं। यानी सही सावधानी बरती जाती, तो करीब 17 हजार मामलों को रोका जा सकता था।
कब हो जाना चाहिए सावधान?
अगर आपकी त्वचा में निम्नलिखित बदलाव दिखें, तो बिना देरी किए डॉक्टर (Dermatologist/GP) से संपर्क करें:
- त्वचा पर कोई नया तिल या मस्सा उभरना।
- पुराने तिल के रंग, आकार या साइज में बदलाव होना।
- त्वचा पर कोई ऐसा घाव या छाला जो लंबे समय से ठीक न हो रहा हो।
राहत की बात: विशेषज्ञों का कहना है कि अगर शुरुआती स्टेज (Early Stage) में ही इस बीमारी का पता चल जाए, तो इलाज के सफल होने की संभावना 95 प्रतिशत तक होती है।
बचाव के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह: सिर्फ सनस्क्रीन काफी नहीं
स्किन कैंसर से बचने के लिए डॉक्टरों ने कुछ बेहद जरूरी गाइडलाइंस जारी की हैं:
- ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन: हमेशा SPF 30 या उससे अधिक वाले ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें।
- कपड़ों का चुनाव: सिर्फ सनस्क्रीन पर निर्भर न रहें; धूप में निकलते वक्त पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।
- पीक ऑवर्स में बचें: दोपहर की तेज धूप (जब UV किरणें सबसे खतरनाक होती हैं) के समय छांव में रहने की कोशिश करें।
- सनबेड से तौबा: कृत्रिम टैनिंग या सनबेड के इस्तेमाल से पूरी तरह दूरी बना लें।
त्वचा पर दिखने वाले हर बदलाव को हल्के में न लें। आपकी थोड़ी सी सतर्कता आपको एक बड़े खतरे से बचा सकती है।
