गढ़वा की जीवनदायिनी सरस्वती नदी को बचाने के लिए युवा अभिषेक भारद्वाज द्वारा रंका मोड़ पर शुरू किया गया पांच दिवसीय ‘एकल सत्याग्रह’ आखिरकार सफल रहा। तपती गर्मी और भीषण धूप में तख्ती लेकर अकेले शुरू हुए इस आंदोलन ने धीरे-धीरे जनआंदोलन का रूप ले लिया। प्रशासन ने आंदोलन के पांचवें दिन सरस्वती नदी की सफाई शुरू कराने का आश्वासन दिया, जिसके बाद अभिषेक भारद्वाज ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया। गढ़वा के एसडीएम संजय कुमार ने स्पष्ट किया कि 23 मई से ही सरस्वती नदी की सफाई कार्य धरातल पर शुरू कर दिया जाएगा। पिछले पांच दिनों से रंका मोड़ पर अभिषेक भारद्वाज लगातार डटे हुए थे। मई की प्रचंड गर्मी में भी उनका संकल्प कमजोर नहीं पड़ा। शुरुआत में लोग इसे एक व्यक्ति का संघर्ष मान रहे थे, लेकिन धीरे-धीरे सोशल मीडिया से लेकर चौक-चौराहों तक इस मुहिम को व्यापक समर्थन मिलने लगा।
आंदोलन को पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर, भारत करणी सेना गढ़वा जिला युवा इकाई के अध्यक्ष शुभम सिंह और आजसू जिलाध्यक्ष दीपक शर्मा समेत कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों का समर्थन मिला। लोगों का कहना था कि सरस्वती नदी गढ़वा की पहचान और जीवनरेखा है, जिसे बचाना जरूरी है। इस आंदोलन की सफलता के पीछे एसडीएम संजय कुमार की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। वे पहले गढ़वा नगर परिषद में कार्यपालक पदाधिकारी रह चुके हैं और उसी दौरान उन्होंने सरस्वती नदी सफाई अभियान की शुरुआत कराई थी। प्रशासनिक फेरबदल के बाद यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई थी, लेकिन अब एक बार फिर इसे सक्रिय किया जा रहा है।
अभिषेक भारद्वाज ने कहा कि
“सरस्वती नदी का बहता पानी ही गढ़वा का भविष्य है। उन्होंने प्रशासन के त्वरित निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि यह सिर्फ सफाई अभियान नहीं, बल्कि गढ़वा के आने वाले कल को सुरक्षित करने की शुरुआत है। वहीं स्थानीय लोगों और प्रबुद्ध नागरिकों ने भी प्रशासन के साथ मिलकर नदी को अतिक्रमण और गंदगी से मुक्त कराने का संकल्प लिया है, ताकि सरस्वती नदी फिर से अपने पुराने स्वरूप में बह सके”।
