टुंडी रोड चतरो स्थित बालमुकुंद फैक्ट्री में प्रबंधन और मजदूरों के बीच ठन गई है। बुधवार सुबह 10 बजे से फैक्ट्री गेट के समीप असंगठित मजदूर मोर्चा और भाकपा माले के बैनर तले मजदूरों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। यह विरोध प्रदर्शन चार स्थानीय मजदूरों—दिलीप राय, वीरेंद्र चौधरी, महताब अंसारी और मोहम्मद मिनहाज—को बिना किसी ठोस कारण के काम से निकाले जाने के खिलाफ किया जा रहा है।
धरने पर बैठे श्रमिकों का कहना है कि उन्होंने काम पर वापसी के लिए प्रबंधन से कई बार हाथ जोड़कर विनती की और प्रशासनिक विभाग को पत्र भी लिखा, लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन ने उनकी एक न सुनी। हार मानकर अब मजदूरों ने ‘आर-पार की लड़ाई’ का मन बना लिया है। असंगठित मजदूर मोर्चा के सचिव कन्हाई पांडे ने स्पष्ट किया कि जब तक इन चारों मजदूरों को सम्मानपूर्वक वापस काम पर नहीं लिया जाता, शांतिपूर्ण धरना समाप्त नहीं होगा।
मजदूरों ने केवल छंटनी ही नहीं, बल्कि फैक्ट्री के भीतर व्याप्त अव्यवस्थाओं के खिलाफ भी आवाज उठाई है। प्रबंधन को सौंपे गए 8 सूत्री मांग पत्र में मुख्य रूप से शामिल हैं:
- ड्यूटी 8 घंटे निर्धारित की जाए।
- झारखंड सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन लागू हो।
- सभी मजदूरों को ईएसआई और पीएफ का लाभ मिले।
- 75% स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया जाए।
- कारखाने में सुरक्षा उपकरण, प्रदूषण नियंत्रण और 8 किमी के दायरे में बिजली-पानी-स्वास्थ्य की सुविधा बहाल हो।
भाकपा माले नेता राजेश सिन्हा ने रांची से फोन पर समर्थन देते हुए कहा कि मजदूरों का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने घोषणा की है कि वे गुरुवार से खुद धरना स्थल पर मौजूद रहेंगे। धरने में किशोरी राय, लखन कोल, दीपक गोस्वामी सहित निमिया देवी और सरिता जैसी दर्जनों महिला श्रमिक भी पूरी मजबूती से डटी हुई हैं।
फिलहाल इस प्रदर्शन पर फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होने के आसार हैं।
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