पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कलकत्ता हाई कोर्ट में ‘वकील के गाउन’ में पेश होना अब कानूनी विवादों में घिर गया है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से 48 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। बीसीआई ने मुख्यमंत्री के अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण और उनके प्रैक्टिस स्टेटस को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
बीसीआई के प्रधान सचिव श्रीरामंतो सेन द्वारा जारी पत्र में विशेष रूप से 2011 से 2026 तक ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री पद पर रहने के दौरान उनके बार लाइसेंस की स्थिति की जानकारी मांगी गई है। काउंसिल ने पूछा है कि:
- क्या मुख्यमंत्री पद पर रहने के दौरान उनका प्रैक्टिस लाइसेंस निलंबित था?
- क्या दोबारा अदालत में पेश होने से पहले उन्होंने अपना लाइसेंस सक्रिय करवाया?
- 2011 से अब तक उनके बार पंजीकरण की वास्तविक स्थिति क्या रही है?
बार काउंसिल के नियमों के मुताबिक, यदि कोई अधिवक्ता किसी संवैधानिक पद या लाभ के पद पर नियुक्त होता है, तो उसे अपनी सेवा अवधि के दौरान वकालत का लाइसेंस निलंबित कराना अनिवार्य होता है। बिना लाइसेंस सक्रिय कराए कानूनी पोशाक में अदालत की कार्यवाही में भाग लेना नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
ममता बनर्जी कलकत्ता हाई कोर्ट में अधिवक्ता तपशिन्या बंद्योपाध्याय द्वारा दायर उस जनहित याचिका के सिलसिले में पहुंची थीं, जिसमें 2026 विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के कार्यालयों और कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप लगाया गया है। इस दौरान उनके साथ वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य और सांसद कल्याण बनर्जी भी मौजूद थे।
मीडिया में ममता बनर्जी की वकील के लिबास वाली तस्वीरें वायरल होने के बाद बीसीआई की यह कार्रवाई सामने आई है। अब सबकी नजरें पश्चिम बंगाल बार काउंसिल की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि नियमों की अनदेखी पाई जाती है, तो यह मामला ममता बनर्जी के लिए कानूनी मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
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