चाईबासा में आगामी जनगणना को लेकर आदिवासी समाज के बीच सरना धर्म कोड की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। आदिवासी मुंडा समाज विकास समिति ने तमारिया/तमाड़िया उर्फ मुंडा जनजाति समुदाय से अपील की है कि वे जनगणना के दौरान धर्म वाले कॉलम में “सरना” दर्ज कराएं, ताकि आदिवासी समुदाय की अलग धार्मिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिल सके।
समिति के केंद्रीय अध्यक्ष बुधराम लागुरी ने मंगलवार को जारी प्रेस बयान में कहा कि आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति पूजक परंपरा का पालन करता आया है। जल, जंगल और जमीन से जुड़ी आस्था, सरना स्थल, जाहेरथान और प्रकृति पूजा आदिवासी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं। ऐसे में समुदाय की धार्मिक पहचान को सही स्वरूप में दर्ज कराना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से सरना धर्म कोड को लेकर आंदोलन चल रहा है और अब जनगणना के माध्यम से समाज अपनी वास्तविक पहचान दर्ज कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार यदि बड़ी संख्या में लोग “सरना” धर्म दर्ज कराते हैं, तो केंद्र सरकार पर अलग सरना धर्म कोड लागू करने का दबाव और मजबूत होगा।
आदिवासी मुंडा समाज विकास समिति ने इस अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने का निर्णय लिया है। इसके तहत बैठकें आयोजित की जाएंगी और युवाओं को सोशल मीडिया व जनसंपर्क के जरिए जोड़ा जाएगा। समिति का मानना है कि यह केवल धार्मिक पहचान का विषय नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, परंपरा और अस्तित्व को सुरक्षित रखने की लड़ाई है।
समाज के बुजुर्गों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी लोगों से एकजुट होकर अपनी पहचान को सुरक्षित रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी संस्कृति और परंपरा को संरक्षित रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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