महिलाओं की सेहत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जिसे हम अब तक PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) के नाम से जानते थे, उसका नाम बदलकर अब PMOS (Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome) कर दिया गया है।
दुनियाभर के मेडिकल एक्सपर्ट्स की सर्वसम्मति के बाद यह बदलाव किया गया है। लेकिन सवाल यह है कि दशकों से चले आ रहे इस नाम को बदलने की जरूरत क्यों पड़ी और इसका आपकी सेहत पर क्या असर पड़ेगा? आइए जानते हैं विस्तार से।
आखिर क्यों बदला गया ‘PCOS’ का नाम?
रिसर्चर्स और एंडोक्राइन सोसाइटी के विशेषज्ञों के अनुसार, “PCOS” शब्द चिकित्सकीय रूप से भ्रम पैदा करता था। नाम बदलने के पीछे दो मुख्य कारण हैं:
- सिस्ट का भ्रम: ‘पॉलीसिस्टिक’ शब्द का अर्थ है अंडाशय में कई सिस्ट (गांठें) होना। जबकि हकीकत यह है कि इस समस्या से पीड़ित कई महिलाओं के अंडाशय में वास्तव में कोई सिस्ट नहीं होती। इस वजह से कई महिलाएं डायग्नोसिस में देरी करती थीं, क्योंकि उन्हें लगता था कि बिना सिस्ट के उन्हें यह बीमारी नहीं हो सकती।
- अधूरा अर्थ: पुराना नाम केवल अंडाशय (Ovary) पर केंद्रित था, जबकि यह बीमारी शरीर के मेटाबॉलिज्म, हार्मोन, दिल की सेहत और मेंटल हेल्थ को भी प्रभावित करती है।
क्या है नए नाम ‘PMOS’ का असली मतलब?
नया नाम PMOS (पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम) इस बीमारी की जटिलता को बेहतर तरीके से दर्शाता है:
- पॉलीएंडोक्राइन (Polyendocrine): यह दर्शाता है कि शरीर के कई हार्मोन सिस्टम इससे प्रभावित होते हैं।
- मेटाबॉलिक (Metabolic): यह इंसुलिन रेजिस्टेंस, मोटापा और डायबिटीज के खतरों को इंगित करता है।
- ओवेरियन (Ovarian): यह ओव्यूलेशन, पीरियड्स और फर्टिलिटी पर पड़ने वाले असर को दर्शाता है।
- सिंड्रोम (Syndrome): यह लक्षणों के एक समूह को दर्शाता है, न कि केवल एक बीमारी को।
PMOS के मुख्य लक्षण
भले ही नाम बदल गया हो, लेकिन इसके लक्षण वही हैं। अगर आपको नीचे दिए गए संकेत दिख रहे हैं, तो सावधानी बरतें:
- पीरियड्स का अनियमित होना या समय पर न आना।
- शरीर और चेहरे पर अनचाहे बालों का उगना (Hirsutism)।
- तेजी से वजन बढ़ना या घटाने में बहुत मुश्किल होना।
- गंभीर मुंहासे और बालों का झड़ना।
- इंसुलिन रेजिस्टेंस और थकान।
- गर्भधारण (Pregnancy) में समस्या आना।
क्या इलाज के तरीके में भी होगा बदलाव?
नाम बदलने का प्राथमिक उद्देश्य सटीक डायग्नोसिस (पहचान) और बीमारी से जुड़े सामाजिक टैबू को कम करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, इलाज का मूल आधार अब भी वही रहेगा, जो लाइफस्टाइल मैनेजमेंट पर केंद्रित है:
- बैलेंस्ड डाइट: चीनी और प्रोसेस्ड फूड से दूरी।
- नियमित व्यायाम: वजन को नियंत्रित रखने के लिए फिजिकल एक्टिविटी।
- तनाव और नींद: मेंटल हेल्थ पर ध्यान देना और पर्याप्त नींद लेना।
- मेडिकल थेरेपी: जरूरत पड़ने पर हार्मोनल दवाएं और इंसुलिन मैनेज करने वाली दवाएं।
PCOS से PMOS की ओर यह बदलाव केवल शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि इस बीमारी को गंभीरता से समझने की एक नई दिशा है। अब डॉक्टर केवल ‘सिस्ट’ नहीं देखेंगे, बल्कि आपके पूरे मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल हेल्थ का इलाज करेंगे।
