झारखंड में शिक्षा नीति 2026 पर रार: 600 वित्त रहित संस्थाओं ने खोला मोर्चा, 2 जून को जलेगा ड्राफ्ट; रांची में महाधरना की चेतावनी

झारखंड में नई शिक्षा नियमावली 2026 पर बवाल, 10 हजार शिक्षकों ने दी रांची ठप करने की चेतावनी।

Johar News Times
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झारखंड सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति के तहत तैयार की जा रही “झारखंड माध्यमिक विद्यालय सेकेंडरी क्लास 9 से 12 स्थापना अनुमति एवं प्रस्वीकृति नियमावली 2026” का राज्यभर में जोरदार विरोध शुरू हो गया है। रांची में आयोजित एक राज्यस्तरीय महाबैठक में सूबे के 600 वित्त रहित इंटरमीडिएट कॉलेजों एवं उच्च विद्यालयों के प्राचार्यों, प्रधानाचार्यों और शिक्षक प्रतिनिधियों ने इस नीति के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सरकार पहले ही इन संस्थाओं को मान्यता दे चुकी है, इसलिए कोई भी संस्थान किसी भी परिस्थिति में दोबारा प्रस्वीकृति के लिए आवेदन नहीं करेगा। यदि सरकार ने जबरन नियम थोपने की कोशिश की, तो राज्य के 10 हजार शिक्षक और कर्मचारी रांची की सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।

मोर्चा के नेताओं ने सरकार की नई नियमावली की व्यावहारिकताओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। नेताओं का कहना है कि नई नीति में 1000-1000 वर्गफीट की चार प्रयोगशालाएं और इतने ही बड़े पुस्तकालय की शर्त रखी गई है, जो खुद कई सरकारी विद्यालयों में भी उपलब्ध नहीं है।

इसके अलावा, सुरक्षा कोष के नाम पर सामान्य क्षेत्र के संस्थानों से 6 लाख रुपये और जनजातीय क्षेत्रों से 4 लाख रुपये दोबारा जमा कराने के प्रावधान का भी कड़ा विरोध किया गया है।

“वर्ष 2008 की नियमावली के तहत शहरी क्षेत्रों में 50 डिसमिल जमीन पर मान्यता मिली थी। अब अचानक दो एकड़ जमीन की शर्त लगाना पूरी तरह अव्यवहारिक है। सरकारी स्कूलों के लिए अलग और हमारे लिए अलग नियम क्या समानता के अधिकार का उल्लंघन नहीं है?”शिक्षक प्रतिनिधि मोर्चा

विभाग द्वारा वित्त रहित संस्थाओं को कथित रूप से समाप्त करने की कोशिशों के खिलाफ मोर्चा ने चरणबद्ध तरीके से आंदोलन की घोषणा की है:

  • 29 मई 2026: मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और शिक्षा सचिव को ज्ञापन सौंपकर ड्राफ्ट में संशोधन की मांग की जाएगी।
  • 02 जून 2026: राज्य के सभी 600 स्कूल-कॉलेजों में नई नियमावली के ड्राफ्ट की प्रतियां जलाई जाएंगी। साथ ही नीति निर्माता समिति के संयोजक सुवेंदु कुमार को हटाने की मांग की जाएगी।
  • 12 जून 2026: रांची के लोक भवन के सामने एकदिवसीय महाधरना दिया जाएगा और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
  • अंतिम चेतावनी: यदि इसके बाद भी समाधान नहीं निकला, तो 10 हजार शिक्षक-कर्मचारी मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे।

विधायकों को हटाने और नीति के उल्लंघन का आरोप

बैठक में शासी निकाय से विधायकों को हटाने के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि यह अधिकार अधिनियम में निहित है और बिना कानून में संशोधन किए केवल नियमावली से इसे बदला नहीं जा सकता। प्रतिनिधियों ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्पष्ट है कि किसी भी शिक्षक की नौकरी नहीं जाएगी, लेकिन झारखंड सरकार की यह नियमावली संस्थानों को बंद कराकर शिक्षकों को बेरोजगार करने वाली है।

इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता चंदेश्वर पाठक ने की और मंच संचालन गणेश महतो द्वारा किया गया। बैठक में कुंदन कुमार सिंह, रघुनाथ सिंह, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, फजलुल कादरी अहमद, मनीष कुमार सहित राज्यभर से आए सैकड़ों शिक्षक और महिला प्राचार्य उपस्थित थीं।

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