राजधानी रांची के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान में मरीजों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिम्स में रात के खाने में परोसा गया अंडा खाने के बाद कई मरीजों और उनके परिजनों की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिससे पूरे अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। प्रभावित लोगों में उल्टी, तेज पेट दर्द और दस्त (फूड प्वाइजनिंग) जैसे लक्षण देखे गए हैं।
परिजनों का आरोप- समय पर नहीं मिला इलाज, मरीजों ने ठुकराया खाना
घटना के बाद पीड़ित परिजनों ने रिम्स प्रबंधन पर लापरवाही का बड़ा आरोप लगाया है। उनका कहना है कि तबीयत बिगड़ने के बाद भी समय पर पर्याप्त चिकित्सा सहायता नहीं दी गई। इस लापरवाही और खराब भोजन के विरोध में कई वार्डों के मरीजों ने रात का खाना लेने से साफ इनकार कर दिया और रिम्स प्रबंधन को लिखित शिकायत पत्र सौंपकर कार्रवाई की मांग की।
प्रबंधन की सफाई: 2 मरीज और 17-18 परिजन हुए प्रभावित
मामले को बढ़ता देख रिम्स के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिशिर कुमार ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि केवल दो मरीजों में पेट दर्द और उल्टी की शिकायत मिली है, जबकि प्रभावित होने वाले अन्य 17 से 18 लोग मरीजों के परिजन हैं। शुरुआती जांच के अनुसार, परिजनों ने मरीजों के हिस्से का भोजन और अंडा खा लिया था, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ी। राहत की बात यह है कि सभी प्रभावित लोग फिलहाल खतरे से बाहर हैं और डॉक्टरों की निगरानी में हैं।
डॉ. शालिनी सुंदरम की अध्यक्षता में हाई-लेवल कमेटी गठित
इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए रिम्स प्रबंधन ने फौरन एक हाई-लेवल तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया है। पीएसएम विभाग की प्रमुख डॉ. शालिनी सुंदरम को इस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। इस समिति में माइक्रोबायोलॉजी और मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों को शामिल किया गया है।
