झारखंड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम पर हाई कोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगा जवाब; ₹1 करोड़ लाइसेंस शुल्क पर अंतरिम रोक बरकरार

प्राइवेट यूनिवर्सिटी एक्ट पर झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा रुख: 1 करोड़ रुपये फीस वाले नियम पर रोक जारी, सरकार से मांगा जवाब!

Johar News Times
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झारखंड हाई कोर्ट ने ‘झारखंड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2024’ को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को कड़ी हिदायत दी है। अदालत ने इस विवादित कानून के कई कड़े प्रावधानों पर निजी विश्वविद्यालयों की आपत्तियों को देखते हुए सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है। कोर्ट ने साफ किया है कि जब तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक अधिनियम के विवादित प्रावधानों पर लगी अंतरिम रोक जारी रहेगी।

मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने बुधवार को इस मामले की सुनवाई की।

खबर की मुख्य बातें :

  • नए कानून के तहत निजी विश्वविद्यालयों के लिए 15 दिनों के भीतर 1 करोड़ रुपये का लाइसेंस शुल्क जमा करना अनिवार्य किया गया है, जिसका कड़ा विरोध हो रहा है।
  • कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया, संचालकों की शैक्षणिक योग्यता और प्रशासनिक नियमों को लेकर भी यूनिवर्सिटीज ने आपत्तियां जताई हैं।
  • हाई कोर्ट द्वारा अधिनियम के कार्यान्वयन पर लगाई गई अंतरिम रोक फिलहाल जारी रहेगी।

सरकार और विश्वविद्यालयों के बीच बैठक की रिपोर्ट पेश

सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया गया कि हाई कोर्ट के पिछले निर्देश के बाद निजी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों और राज्य के महाधिवक्ता के बीच इन विवादित प्रावधानों को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी। इस बैठक की ‘मिनट-टू-मिनट’ रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई। इसके बाद खंडपीठ ने सरकार को आदेश दिया कि वह विश्वविद्यालयों द्वारा उठाए गए हर एक बिंदु और उनके द्वारा सुझाए गए विकल्पों पर अपना स्पष्ट पक्ष रखे। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।

इन प्रमुख विश्वविद्यालयों और ट्रस्टों ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा

इस अधिनियम के खिलाफ एकजुट होकर झारखंड के कई बड़े निजी शिक्षण संस्थानों और ट्रस्टों ने याचिका दायर की है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • सरला बिरला यूनिवर्सिटी
  • राधा गोविंद यूनिवर्सिटी
  • साईंनाथ यूनिवर्सिटी
  • संध्या शंभू एजुकेशनल ट्रस्ट
  • सोना देवी मेमोरियल एजुकेशन फाउंडेशन ट्रस्ट
  • वनांचल एजुकेशन एंड वेलफेयर ट्रस्ट
  • रामचंद्र चंद्रवंशी वेलफेयर ट्रस्ट और शिवम ट्रस्ट।

शिक्षा जगत की स्वायत्तता से जुड़ा बड़ा मामला

इस पूरे विवाद को झारखंड में उच्च शिक्षा और निजी विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बनाम सरकारी नियंत्रण के एक बड़े कानूनी दंगल के रूप में देखा जा रहा है। यदि हाई कोर्ट का फैसला विश्वविद्यालयों के पक्ष में आता है, तो सरकार को अपने नियमों में बड़ा बदलाव करना पड़ सकता है। अब सभी की नजरें अगले हफ्ते होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।

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