अयोध्या के प्रसिद्ध राम मंदिर में चढ़ावे और दान में हुई कथित अनियमितताओं के मामले में गठित विशेष जांच टीम ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। तीन सदस्यीय SIT ने यह रिपोर्ट सूबे के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को दी है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद मंदिर प्रबंधन और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
SIT की रिपोर्ट में क्या हैं बड़ी सिफारिशें?
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, विशेष जांच टीम ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में बेहद कड़े कदम उठाने की सिफारिश की है:
- पिछले पांच वर्षों के दौरान मंदिर में आए पूरे चढ़ावे और दान का गहन ऑडिट कराया जाए।
- चढ़ावे के प्रबंधन में हुई वित्तीय अनियमितताओं और गड़बड़ियों की गहराई से जांच के लिए एफआईआर दर्ज की जाए।
- मंदिर में चढ़ावे और नकदी के प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता लाने के लिए व्यवस्था को सुधारा जाए।
इसके साथ ही SIT ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन और मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज को संभालने के लिए किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को मुख्य कार्यपालक अधिकारी नियुक्त करने का भी सुझाव दिया है।
चंपत राय समेत 100 से अधिक लोगों से पूछताछ
योगी सरकार ने इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा 7 जून को मुद्दा उठाए जाने के बाद 13 जून को SIT का गठन किया था। अपनी जांच के दौरान SIT ने बेहद कड़ा रुख अपनाया:
- टीम ने मंदिर के दान रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, नकदी की गिनती की प्रक्रिया और लॉकर में रखी कीमती वस्तुओं की बारीकी से पड़ताल की।
- जांच के दायरे में ट्रस्ट के पदाधिकारी, पुजारी, बैंक अधिकारी और कैश काउंटिंग से जुड़े कर्मचारियों सहित 100 से अधिक लोग आए, जिनसे पूछताछ की गई।
- ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और मामले से जुड़े रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव व उनके करीबियों से कई दौर की पूछताछ हुई। रिपोर्ट में संकेत हैं कि यह गड़बड़ी पिछले कई सालों से लगातार चल रही थी।
एक्शन में बैंक और ट्रस्ट, 40 कर्मचारी हटाए गए
जांच की आंच के बीच राम मंदिर ट्रस्ट और संबंधित बैंक ने संयुक्त रूप से एक बड़ा फैसला लेते हुए चढ़ावे की गिनती और कैश मैनेजमेंट में लगे 40 पुराने कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। उनकी जगह पूरी तरह से नए कर्मियों की नियुक्ति की गई है ताकि पारदर्शी तरीके से काम हो सके।
फिलहाल, उत्तर प्रदेश सरकार ने साफ किया है कि यह केवल प्रारंभिक रिपोर्ट है और मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है। इस पर अंतिम और कड़ा फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्तर पर लिया जाएगा, जिसके बाद ही सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी होगा।
