सरायकेला-खरसावां जिले के बुरुडीह पंचायत अंतर्गत देवली गांव में रजो संक्रांति का त्योहार बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर गांव में पारंपरिक घट यात्रा और वार्षिक छऊ नृत्य का भव्य आयोजन किया गया, जिसे देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु और कला प्रेमी पहुंचे।
नदी से मंदिर तक उमड़ी आस्था, गूंजे ढोल-नगाड़े
धार्मिक अनुष्ठान के तहत श्रद्धालुओं ने संजय नदी से शुभ घट, माथा घट, यात्रा घट और गरिया भार निकाला। इसके बाद ढोल-नगाड़ों, ढाक और भक्ति गीतों की गूंज के बीच भव्य यात्रा निकालते हुए इन्हें मंदिर परिसर में स्थापित किया गया। कालिका घट यात्रा के साथ यह अनुष्ठान संपन्न हुआ।
यात्रा के दौरान पूरे मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने आरती उतारकर इसका स्वागत किया। इसके बाद प्राचीन शिव मंदिर में पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की गई।
छऊ नृत्य की प्रस्तुतियों ने मोहा मन
शिव मंदिर परिसर में आयोजित छऊ नृत्य कार्यक्रम मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा, जिसमें पांच अलग-अलग गांवों के कलाकारों ने पौराणिक कथाओं और लोकजीवन पर आधारित शानदार नृत्य प्रस्तुत किए:
- ब्राह्मणसाई के कलाकार: कृष्ण-सुदामा, शिव-पार्वती, लव-कुश और बालि वध प्रसंग।
- कवाटसाई के कलाकार: किसान और दामिनी (लोकजीवन पर आधारित)।
- तांतीसाई के कलाकार: भक्त प्रह्लाद की कथा।
- पोटका के कलाकार: शिकारी नृत्य।
- गुवाबेड़ा के कलाकार: सीताहरण की मार्मिक प्रस्तुति।
कलाकारों के जीवंत अभिनय और अद्भुत नृत्य कौशल ने उपस्थित दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।
1935 से लगातार निभाई जा रही है परंपरा
ग्रामीणों ने बताया कि देवली गांव में रजो संक्रांति पर घट-पाट यात्रा और छऊ नृत्य के आयोजन का इतिहास बेहद गौरवशाली है। वर्ष 1935 से यह परंपरा बिना रुके लगातार निभाई जा रही है। हर साल की तरह इस बार भी इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर के गवाह बनने के लिए दूर-दराज से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
इस सफल आयोजन में मुख्य पुजारी प्रदीप सतपथी, जयदेव कवाट, गोपाल सतपथी, हेमंत नायक, पवित्र तांती, गणेश नायक, जेना दिग्गी, विजय दिग्गी सहित देवली गांव के तमाम ग्रामीणों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
