पंजाब की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी धार्मिक और राजनीतिक खबर सामने आ रही है। सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें ‘गुरु दोषी’ और ‘पंथ विरोधी’ घोषित कर दिया है।
अमृतसर में हुई पांच सिंह साहिबानों की आपात बैठक के बाद कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने इस ऐतिहासिक और कड़े फैसले का ऐलान किया। इस फैसले के बाद से पंजाब के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा विवाद मुख्यमंत्री भगवंत मान के एक वायरल वीडियो से जुड़ा है:
- वायरल वीडियो में मुख्यमंत्री कथित रूप से गुरु साहिब की तस्वीर के सामने हाथ में शराब का गिलास लिए दिखाई दे रहे हैं। सिख संगठनों ने इसे धार्मिक मर्यादा का गंभीर उल्लंघन माना है।
- मुख्यमंत्री भगवंत मान इस वीडियो को पहले ही खारिज कर चुके हैं और उनका कहना है कि इस वीडियो के साथ AI के जरिए छेड़छाड़ की गई है।
फॉरेंसिक जांच में हुआ बड़ा खुलासा
अकाल तख्त के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने बताया कि इस मामले को हल्के में नहीं लिया गया। संस्था ने वीडियो की प्रामाणिकता जांचने के लिए इसे भारत सरकार से मान्यता प्राप्त दो अलग-अलग फॉरेंसिक लैब में भेजा था। दोनों ही लैब की रिपोर्ट में इस वीडियो को पूरी तरह वास्तविक पाया गया है।
“मुख्यमंत्री से इस वीडियो के फर्जी होने के सबूत मांगे गए थे, लेकिन छह महीने का लंबा समय बीत जाने के बाद भी उनकी तरफ से कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।” — ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज, कार्यकारी जत्थेदार
बेअदबी कानून (संशोधन विधेयक-2026) पर भी रार
विवाद सिर्फ वीडियो तक सीमित नहीं है। अकाल तख्त ने पंजाब सरकार द्वारा लाए गए ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक-2026’ पर भी सख्त आपत्ति जताई है। धार्मिक संस्थाओं का तर्क है कि बेअदबी से जुड़े इस कानून के कुछ मौजूदा प्रावधानों में तुरंत संशोधन की आवश्यकता है, जिसके लिए सरकार को पहले ही 15 दिनों का समय दिया गया था।
29 जून को मंत्रियों और विधायकों की पेशी
अकाल तख्त ने अब इस मामले में सीधे दखल देते हुए कड़ा कदम उठाया है:
- इस विधेयक का समर्थन करने वाले पंजाब सरकार के सभी मंत्रियों और विधायकों को 29 जून को अकाल तख्त के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया गया है।
- अकाली राजनीति और सिख पंथ में इस तरह की ‘तलब’ को बेहद गंभीर माना जाता है।
पंजाब की राजनीति में भूचाल, AAP की चुप्पी
इस फैसले के बाद पंजाब की राजनीति में भारी हलचल है। जहाँ एक तरफ तमाम धार्मिक संगठन इसे सिख मर्यादा और सम्मान की रक्षा के लिए उठाया गया जरूरी कदम बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी के खेमे में सन्नाटा पसरा है। खबर लिखे जाने तक आम आदमी पार्टी या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
