सड़क हादसों के वक्त ‘गोल्डन ऑवर’ में अगर घायल को इलाज मिल जाए, तो उसकी जान बचाई जा सकती है। इसी बात को चरितार्थ करते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय प्रवक्ता और पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने मानवता और संवेदनशीलता की एक अनूठी मिसाल पेश की है। डिमना रोड पर एक भीषण सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के लिए वह देवदूत बनकर सामने आए और उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाई।
भीड़ बनी रही तमाशबीन, रुक गया नेता का काफिला
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डिमना रोड पर एक अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने एक राहगीर को जोरदार टक्कर मार दी और मौके से फरार हो गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि व्यक्ति सड़क किनारे गिरकर दर्द से तड़पने लगा। व्यस्त सड़क होने के कारण वहां से लगातार गाड़ियां और लोग गुजर रहे थे, लेकिन कानूनी झंझटों या संवेदनहीनता के चलते कोई भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आ रहा था।
इसी दौरान, जमशेदपुर में एक कार्यक्रम से लौट रहे पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी की नजर सड़क पर तड़पते हुए उस घायल शख्स पर पड़ी। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उन्होंने बिना एक पल गंवाए तुरंत अपने काफिले को रुकवाया।
खुद उठाकर ले गए अस्पताल, इलाज शुरू होने तक रहे मौजूद
कुणाल षाड़ंगी खुद गाड़ी से उतरे और स्थानीय लोगों की मदद से घायल व्यक्ति को संभाला। समय की अहमियत को समझते हुए उन्होंने एम्बुलेंस का इंतजार करने के बजाय तत्काल अपनी व्यवस्था से घायल को डिमना रोड स्थित गंगा मेमोरियल अस्पताल पहुंचाया।
अस्पताल पहुंचने के बाद उन्होंने डॉक्टरों से बात कर घायल का इमरजेंसी इलाज शुरू करवाया। झामुमो नेता केवल अस्पताल पहुंचाकर ही नहीं रुके, बल्कि जब तक डॉक्टरों ने घायल की स्थिति को स्थिर नहीं बता दिया और उसका इलाज सुचारू रूप से शुरू नहीं हो गया, तब तक वह अस्पताल परिसर में ही डटे रहे।
समाज के लिए एक प्रेरणा: इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और सोशल मीडिया पर कुणाल षाड़ंगी के इस कदम की जमकर तारीफ हो रही है। लोगों का कहना है कि अक्सर लोग पुलिसिया कार्रवाई के डर से सड़क हादसों के पीड़ितों की मदद करने से कतराते हैं। ऐसे दौर में एक रसूखदार जनप्रतिनिधि और राजनेता का इस तरह जमीन पर उतरकर किसी आम नागरिक की जान बचाना पूरे समाज के लिए एक बेहद प्रेरणादायक उदाहरण है।
