सरायकेला-खरसावां: कुचाई प्रखंड के मरांगहातु गांव में रज पर्व की पूर्व संध्या पर आयोजित वार्षिक छऊ नृत्य एवं मेले में लोक संस्कृति का अद्भुत रंग देखने को मिला। शनिवार रात आयोजित कार्यक्रम में कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। कार्यक्रम का उद्घाटन स्थानीय विधायक दशरथ गागराई ने किया। उन्होंने कहा कि छऊ नृत्य झारखंड की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है और इसके संरक्षण व कलाकारों के प्रोत्साहन के लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा।
गणेश वंदना से हुई शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक गणेश वंदना से हुई। इसके बाद मरांगहातु नीचे टोला छऊ नृत्य दल, स्वर्गीय देवेंद्र सोय छऊ नृत्य दल और स्वर्गीय बुधन लाल सोय छऊ नृत्य दल के कलाकारों ने रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। ढोल, नगाड़ा और शहनाई की धुनों पर कलाकारों ने अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया।

पौराणिक कथाओं ने मोहा मन
कलाकारों ने कृष्ण लीला, हनुमान-मकरध्वज मिलन, चंडी युद्ध, सानरा वंदना, शिकारी, राधिका झूला, सुभद्रा हरण, माया बंधन, द्वापर लीला और कालिया दमन जैसे धार्मिक, पौराणिक और सामाजिक विषयों पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किए। राधा-कृष्ण की लीलाओं और वीरता से जुड़े प्रसंगों को दर्शकों ने खूब सराहा। आयोजन के साथ लगे मेले में भी बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी। आसपास के गांवों से पहुंचे लोगों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मेले का आनंद लिया। रविवार सुबह तक चले इस आयोजन ने क्षेत्र की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत कर दिया। छऊ नृत्य का निर्देशन उस्ताद नंदलाल कुम्हार, प्यारेलाल कुम्हार, रेणुका सोय और कुशल सिंह सोय ने किया। आयोजन की सफलता में ग्रामीणों और समिति के सदस्यों की अहम भूमिका रही।
