प्राकृतिक जल स्रोतों से पेयजल संकट दूर करने की पहल, विधायक दशरथ गागराई ने रायजामा क्षेत्र का किया दौरा

प्राकृतिक जल स्रोतों से पेयजल संकट दूर करने की पहल, विधायक दशरथ गागराई ने रायजामा क्षेत्र का किया दौरा

Johar News Times
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सरायकेला-खरसावां: खरसावां विधायक दशरथ गागराई ने बुधवार को पीएचइडी विभाग के अभियंताओं के साथ रायजामा, मुनगाटोला और फेचांगटोला गांवों का दौरा कर पेयजल व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने पहाड़ियों के बीच स्थित प्राकृतिक जल स्रोतों का निरीक्षण किया और ग्रामीणों की जल समस्याओं के स्थायी समाधान का भरोसा दिलाया। ग्रामीणों ने वर्षों से प्राकृतिक जल स्रोतों से पाइप और बांस के सहारे पानी को अपने गांवों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित कर रखी है। इसी पानी से तीनों गांवों के लोग पेयजल और दैनिक उपयोग की जरूरतें पूरी कर रहे हैं।

प्राकृतिक जल स्रोतों का निरीक्षण, स्थायी समाधान की तैयारी

दौरे के दौरान विधायक ने पीएचइडी अधिकारियों के साथ जल स्रोतों की वास्तविक स्थिति का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को ऐसी योजना तैयार करने का निर्देश दिया, जिससे प्राकृतिक स्रोतों के पानी को शुद्ध कर घर-घर तक पहुंचाया जा सके। विधायक ने कहा कि इन जल स्रोतों का उपयोग पेयजल के साथ-साथ सिंचाई और अन्य जरूरतों के लिए भी किया जा सकता है।

रायजामा में ग्रामीणों के साथ बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि क्षेत्र की पेयजल समस्या के समाधान के लिए धन की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर विधायक निधि से भी राशि उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने गांव में दो चबूतरे निर्माण कराने की घोषणा भी की। पीएचइडी के कार्यपालक अभियंता ललित इंदूवार ने बताया कि जल्द ही विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कर विभाग को सौंप दिया जाएगा।

रायजामा और फेचांगटोला में बुनियादी सुविधाओं की कमी

करीब 71 परिवारों वाले रायजामा गांव में एक सोलर संचालित मिनी जलमीनार संचालित है, लेकिन इससे पूरे गांव की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं। वहीं लगभग 12 परिवारों वाले फेचांगटोला में स्थिति और अधिक गंभीर है, जहां न तो कोई चापाकल है और न ही जलमीनार। यहां के ग्रामीण पूरी तरह पहाड़ी से निकलने वाले प्राकृतिक जल स्रोत पर निर्भर हैं। मुनगाटोला में एक सोलर जलमीनार तो है, लेकिन पाइपलाइन में लगातार लीकेज की समस्या के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।

बारिश में बढ़ जाती है परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार प्राकृतिक जल स्रोत उनके लिए जीवनरेखा हैं, लेकिन मानसून के दौरान पहाड़ियों से बहकर आने वाली मिट्टी और गाद पानी को दूषित कर देती है। ऐसे में सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन जाती है। ग्रामीणों ने मांग की कि सरकारी जलापूर्ति योजनाओं को गांव तक पहुंचाकर स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए।

कभी नक्सल प्रभावित रहा क्षेत्र, अब विकास की उम्मीद

रायजामा, फेचांगटोला और मुनगाटोला गांव खरसावां-रड़गांव मुख्य मार्ग पर स्थित हैं और वर्ष 2023-24 तक यह इलाका नक्सल प्रभावित माना जाता था। पिछले दो वर्षों में नक्सली गतिविधियों में कमी आने के बाद अब यहां विकास कार्यों की संभावनाएं बढ़ी हैं। ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से लगभग 600 फीट ऊंची पहाड़ियों पर स्थित प्राकृतिक जल स्रोतों से पाइप और बांस जोड़कर पानी गांव तक पहुंचाने की व्यवस्था बनाई है। ऊंचाई से आने के कारण पानी बिना किसी मोटर या पंप के तेज गति से गांवों तक पहुंच जाता है। वर्षभर जल प्रवाह बने रहने से खेती की सिंचाई में भी मदद मिलती है। ग्रामीण समय-समय पर पाइप और बांस की मरम्मत भी स्वयं करते हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि विधायक और पीएचइडी विभाग की पहल से जल्द ही इस क्षेत्र में सुरक्षित एवं स्थायी पेयजल व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी।

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