पशुपालन और स्वास्थ्य विभाग में करोड़ों रुपये की अवैध निकासी की जांच करेगी एसआईटी, कुल छह मामलों की पड़ताल करेगी सीआईडी,
रांची : झारखंड में सामने आए अवैध वेतन निकासी घोटाले की जांच का दायरा बढ़ गया है। बोकारो, हजारीबाग और चाईबासा के मामलों की जांच कर रही सीआईडी की विशेष जांच टीम (एसआईटी) अब रांची, रामगढ़ और देवघर के तीन और मामलों को अपने हाथ में लेगी। इन मामलों को टेकओवर कर सीआईडी थाना, रांची में पुनः प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। इसके साथ ही सीआईडी के पास ऐसे कुल छह मामलों की जांच की जिम्मेदारी होगी।
रांची में पशुपालन विभाग से जुड़े 2.94 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आया था। इस संबंध में 14 अप्रैल को कोतवाली थाना में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। आरोप है कि कांके स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन के लेखापाल मुनिंद्र कुमार और कर्मचारी संजीव कुमार ने वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के वेतन विपत्रों में हेरफेर कर क्रमशः 1.52 करोड़ और 1.41 करोड़ रुपये अपने खातों में स्थानांतरित कर लिए। मामले में मुनिंद्र कुमार गिरफ्तार होकर जेल जा चुका है, जबकि दूसरा आरोपी फरार है।
देवघर के सारवां थाना क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े 99.06 लाख रुपये के गबन का मामला दर्ज है। आरोप है कि तत्कालीन लेखा लिपिक सविता कुमारी ने वित्तीय वर्ष 2017-18 और 2018-19 में फर्जी वेतन विपत्र बनाकर कई कर्मचारियों के नाम पर सरकारी राशि का अवैध उठाव किया। इस मामले में सविता कुमारी को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
वहीं रामगढ़ में पशुपालन विभाग से करीब 34.25 लाख रुपये की फर्जी निकासी का मामला सामने आया था। विभागीय ऑडिट में अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से अवैध भुगतान की पुष्टि हुई थी। इस मामले की जांच भी अब सीआईडी करेगी। सीआईडी अधिकारियों का मानना है कि सभी मामलों में वित्तीय अनियमितताओं का तरीका काफी हद तक समान है। ऐसे में संयुक्त जांच से पूरे नेटवर्क और संभावित मिलीभगत का खुलासा हो सकता है। अब एसआईटी रांची, रामगढ़, देवघर, बोकारो, हजारीबाग और चाईबासा के मामलों की एक साथ जांच कर घोटाले की जड़ों तक पहुंचने का प्रयास करेगी।
