रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में एंबुलेंस सेवाओं की खराब स्थिति और गर्भवती महिलाओं से जुड़ी लगातार सामने आ रही शिकायतों पर गहरी नाराजगी जताई है। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में इलाज, दवाओं की उपलब्धता और आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता में हर हाल में सुधार दिखना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलने और एंबुलेंस सेवाओं को लेकर लगातार शिकायतें आ रही हैं, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
एआई आधारित कंट्रोल रूम और उबर-ओला मॉडल पर जोर
स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने एंबुलेंस सेवाओं की निगरानी हेतु एआई आधारित कंट्रोल रूम स्थापित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अस्पतालों से संबद्ध सभी एंबुलेंस पूरी तरह क्रियाशील रहें और उनकी संख्या बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जाए। इसके साथ ही मरीजों को त्वरित रूप से अस्पताल पहुंचाने के लिए उबर और ओला जैसी सेवा प्रणाली का अध्ययन कर भविष्य में उसी तर्ज पर व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया।
सभी नागरिकों का बनेगा हेल्थ प्रोफाइल
मुख्यमंत्री ने बच्चों सहित राज्य के सभी नागरिकों का हेल्थ प्रोफाइल तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने अस्पतालों को एयर-कूल बनाने की कार्ययोजना तैयार करने, डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा अस्पतालों में स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं को और मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मरीजों को समय पर उपचार, गुणवत्तापूर्ण दवाएं, बेहतर जांच सुविधाएं और सुदृढ़ आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

ब्रेन स्ट्रोक और गंभीर बीमारियों के लिए विशेष व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने पैरालिसिस, ब्रेन स्ट्रोक, हार्ट अटैक, कैंसर और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों के मरीजों के लिए विशेष चिकित्सा व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और पीजी सीटों की संख्या बढ़ाने तथा पुनर्वास (रिहैब) और थेरेपी सेंटर शुरू करने पर भी बल दिया।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग रणनीति
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां अलग-अलग हैं। इसलिए दोनों क्षेत्रों के लिए अलग-अलग कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि स्थानीय जरूरतों के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाएं विकसित की जा सकें।
स्वास्थ्य विभाग को दिए कई महत्वपूर्ण निर्देश
मुख्यमंत्री ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए कई अन्य निर्देश भी दिए। इनमें रेफरल सिस्टम की ऑडिट रिपोर्ट तैयार करना, आयुष्मान भारत योजना से जुड़े अस्पतालों का मूल्यांकन, ब्लड सेपरेशन यूनिट की स्थापना, ब्लड बैंक लाइसेंस प्रक्रिया में तेजी, निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों के कार्यों में भुगतान संबंधी देरी समाप्त करना और प्रसिद्ध चिकित्सकों को गेस्ट फैकल्टी के रूप में आमंत्रित करना शामिल है। उन्होंने केरल मॉडल की तर्ज पर राज्य में अंगदान (ऑर्गन डोनेशन) को बढ़ावा देने की दिशा में भी पहल करने का निर्देश दिया। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की संवेदनहीनता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आम लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
