घाटशिला कॉलेज के भौतिकी विभाग द्वारा बुधवार को “क्या भारत पृथ्वी पर सबसे ज्यादा गर्म स्थान बनता जा रहा है? : जलवायु परिवर्तन और हीट वेव्स का वैज्ञानिक विश्लेषण” विषय पर एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने देश में तेजी से बढ़ रहे तापमान और पर्यावरण संकट पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
विकास के पैमाने पर ठहरकर विचार करने की जरूरत: प्रो. इंदल पासवान
कार्यक्रम का विषय प्रवेश राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर इंदल पासवान ने किया। उन्होंने कहा, “आज जिस तरह से भारत सहित पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और हीट वेव्स से प्रभावित है, सरकार के साथ-साथ आम जनता को भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। हमें ठहरकर विकास के पैमाने पर विचार करना होगा। यदि विकास का यही अंधाधुंध पैमाना रहा, तो मानव अस्तित्व का खतरा और गहरा हो जाएगा।”
शरीर में पानी की कमी न होने दें: प्राचार्य डॉ. आर. के. चौधरी
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर. के. चौधरी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में देश के अनेक हिस्सों में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप है। ऐसी स्थिति में छात्रों और आम नागरिकों को स्वास्थ्य के प्रति बेहद सतर्क रहना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी:
- कॉलेज आने से पहले पर्याप्त मात्रा में पानी पिएँ।
- संभव हो तो नींबू पानी, ओआरएस या अन्य तरल पदार्थों का सेवन करें।
- धूप में निकलते समय सिर को टोपी, गमछे या छाते से ढककर रखें।
- ऐसे सूती और ढीले वस्त्र पहनें जो शरीर को सीधे सूर्य की किरणों से बचा सकें।
प्राचार्य ने कहा कि हम तुरंत हीट वेव को नियंत्रित नहीं कर सकते, लेकिन जागरूकता और सरल उपायों से इसके दुष्प्रभावों से सुरक्षित रह सकते हैं।
चिंताजनक आंकड़े: विश्व के 100 सबसे गर्म शहरों में 97 भारत के
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. कन्हाई बारिक ने वैज्ञानिक आंकड़ों और स्लाइड प्रस्तुति के माध्यम से भारत में बढ़ती गर्मी के कारणों को विस्तार से समझाया। डॉ. बारीक ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा साझा करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में विश्व के सबसे गर्म शहरों में भारतीय शहरों की संख्या तेजी से बढ़ी है। यदि 26 मई के आंकड़ों पर गौर किया जाए, तो विश्व के 100 सर्वाधिक गर्म शहरों में से 97 शहर भारत के ही थे। यह केवल संयोग नहीं, बल्कि मानव गतिविधियों का परिणाम है।
डॉ. बारीक ने अपने व्याख्यान में कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक तथ्य सामने रखे:
- $CO_2$ में भारी वृद्धि: औद्योगिक क्रांति के पहले वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा लगभग 280 ppm थी, जो आज बढ़कर 425 ppm से अधिक हो चुकी है।
- कोयले पर निर्भरता: भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा $CO_2$ उत्सर्जक देश है, जहाँ की लगभग 70% बिजली अभी भी कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों से बनती है। भारत का वार्षिक $CO_2$ उत्सर्जन 1990 में 0.6 बिलियन टन था, जो आज बढ़कर 3 बिलियन टन से अधिक हो चुका है।
- जंगलों का विनाश: वर्ष 1980 से 2023 के बीच भारत में लगभग 15 लाख हेक्टेयर से अधिक वन भूमि को खनन, उद्योग, और बुनियादी ढांचे के लिए स्वीकृत किया गया। झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे खनिज संपन्न राज्यों में प्राकृतिक वनों का भारी क्षरण हुआ है।
- अरावली पर संकट: अरावली पर्वत श्रृंखला उत्तर भारत को थार मरुस्थल के विस्तार और धूल प्रदूषण से बचाने वाली प्राकृतिक ढाल है। इसके कमजोर होने से दिल्ली-एनसीआर सहित आसपास के क्षेत्रों में तापमान और पर्यावरणीय समस्याएँ बढ़ रही हैं।
- अर्बन हीट आइलैंड : शहरों में कंक्रीट, डामर और ऊँची इमारतों के विस्तार के कारण शहर दिनभर ऊष्मा को सोखते हैं और रात में छोड़ते हैं, जिससे शहरों का तापमान ग्रामीण इलाकों से कई डिग्री अधिक रहता है।
चीन और दक्षिण कोरिया से सीख लेने की जरूरत
अंतरराष्ट्रीय उदाहरण देते हुए डॉ. बारीक ने बताया कि चीन ने पिछले चार दशकों में अपना वन क्षेत्र 12% से बढ़ाकर 24% से अधिक कर लिया है। वहीं, दक्षिण कोरिया ने युद्ध के बाद नष्ट हो चुके वनों को दोबारा खड़ा कर अपने 63% भूभाग को वनाच्छादित बना दिया है।
- प्राकृतिक वनों की कटाई पर कठोर नियंत्रण और बड़े पैमाने पर स्थानीय वृक्षारोपण।
- कोयला आधारित ऊर्जा की जगह सौर और पवन ऊर्जा का विस्तार।
- शहरों में अर्बन फॉरेस्ट और ग्रीन बेल्ट का विकास।
- जल संरक्षण और रेन वाटर हार्वेस्टिंग को प्राथमिकता।
- खनन और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए सख्त पर्यावरणीय मानक।
- पर्यावरण संरक्षण को स्कूली शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाना।
डॉ. बारीक ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा, “भारत का गर्म होना कोई प्राकृतिक नियति नहीं है। यदि हम जंगलों का संरक्षण करें, स्वच्छ ऊर्जा अपनाएँ और सरकारें पर्यावरणीय नीतियों को गंभीरता से लागू करें, तो भारत को पुनः रहने योग्य बनाया जा सकता है।”
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम का समापन जीव विज्ञान की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अर्चना सुरीन के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ. एसपी सिंह, डॉ. दिलचंद राम, डॉ. महेश्वर प्रमाणिक, डॉ. प्रीति बाला, डॉ. कृष्ण प्रसाद, डॉ. कुमार विशाल, डॉ. राम विनय श्याम, डॉ. चिरंतन महतो, समीर कुमार सहित भौतिकी विभाग के भारी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
