लाल किला मैदान में गूंजा जनजातीय गौरव, विष्णुदेव साय बोले- प्रकृति संग विकास का रास्ता दिखा सकता है जनजातीय समाज

लाल किला मैदान में गूंजा जनजातीय गौरव, विष्णुदेव साय बोले- प्रकृति संग विकास का रास्ता दिखा सकता है जनजातीय समाज

Johar News Times
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लाल किला मैदान में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष पर आयोजित राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में देशभर से हजारों जनजातीय प्रतिनिधि, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। जनजाति सुरक्षा मंच और जनजाति जागृति समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। वहीं विष्णु देव साई, मंत्री केदार कश्यप और रामविचार नेताम भी कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान रेखा गुप्ता ने विष्णुदेव साय से सौजन्य मुलाकात की।

पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजे कार्यक्रम में विष्णुदेव साय ने कहा कि जनजातीय समाज भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप है। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते हुए जनजातीय समाज ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखा है और आज पूरी दुनिया को प्रकृति-सम्मत विकास का रास्ता दिखा सकता है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी जनजातीय संस्कृति से जुड़ी है और राज्य का 44 प्रतिशत भूभाग वनाच्छादित है। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा और वीर नारायण सिंह के संघर्ष और बलिदान को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ‘आदि परब’, ‘बस्तर पंडुम’ और ‘बस्तर ओलंपिक’ जैसे आयोजनों के जरिए जनजातीय संस्कृति और प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच दे रही है। साथ ही गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी भाषाओं में प्रारंभिक शिक्षा की पहल की जा रही है, ताकि नई पीढ़ी अपनी संस्कृति और मातृभाषा से जुड़ी रहे।

कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जनजातीय विरासत की झलक पेश की। मांदर और ढोल की धुनों से गूंजता लाल किला मैदान देश की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय एकता का प्रतीक बन गया।

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