सरेंडर नक्सलियों को मिले लाभों की होगी समीक्षा, केंद्र ने झारखंड से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

सरेंडर नक्सलियों को मिले लाभों की होगी समीक्षा, केंद्र ने झारखंड से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

Johar News Times
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मुसाबनी/रांची। आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत दिए गए लाभों की अब विस्तृत जांच की जाएगी। गृह मंत्रालय ने नक्सल प्रभावित राज्यों को निर्देश दिया है कि सभी सरेंडर नक्सलियों को दिए गए आर्थिक सहायता, पुनर्वास पैकेज और अन्य सुविधाओं की समीक्षा की जाए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभ सही तरीके से दिया गया है और इसका दुरुपयोग नहीं हुआ है।

इसी क्रम में पूर्वी सिंहभूम जिले के वर्ष 2017 के सरेंडर मामले की भी समीक्षा मांगी गई है। उस समय 15 फरवरी 2017 को गुड़ाबांदा के जियान गांव में सीपीआई (माओवादी) के बंगाल-झारखंड-ओडिशा बॉर्डर रीजनल कमेटी सचिव मंगल जी उर्फ कान्हू मुंडा के नेतृत्व में 12 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। इनमें जितेन मुंडा, भोगलु सिंह, चुन्नू मुंडा, शंकर मुंडा, फूलमनी मुंडा, सुंदर मुर्मू, जारा मुर्मू, फोगड़ा मुंडा, सहदेव मुंडा, संगीता किस्कू और मंगल टुडू समेत कई नाम शामिल हैं।

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार कान्हू मुंडा को आत्मसमर्पण के बाद कुल 31.30 लाख रुपये की सहायता दी गई थी। इसमें 25 लाख रुपये की इनामी राशि, 75 हजार रुपये एके-47 के साथ सरेंडर करने पर, 5.5 लाख रुपये पुनर्वास अनुदान और बच्चों की शिक्षा के लिए राशि शामिल बताई गई है। अन्य 11 नक्सलियों को भी उनकी भूमिका और श्रेणी के अनुसार अलग-अलग आर्थिक सहायता और पुनर्वास लाभ दिए गए थे।

अब सरकार ने सभी जिलों से सरेंडर नक्सलियों के लाभों का पूरा रिकॉर्ड मंगाने और उसकी जांच करने का निर्देश दिया है। जिन मामलों में भुगतान या लाभ लंबित हैं, उनकी भी रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को भेजी जाएगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य पुनर्वास नीति की वास्तविक स्थिति और पारदर्शिता की समीक्षा करना बताया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2013 से 22 मई 2026 तक झारखंड में 306 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि इसी अवधि में 225 नक्सली मारे गए और 5,471 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।

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