चांडिल के सपरूम जंगल में 12 हाथियों का झुंड, मंडराया मानव-हाथी संघर्ष का खतरा

Johar News Times
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झारखंड-पश्चिम बंगाल सीमावर्ती चांडिल रेंज के सपरूम जंगल और मुख्य सड़क के आसपास 12 हाथियों का एक बड़ा झुंड डेरा जमाए हुए है। हाथियों की इस मौजूदगी से इलाके में दहशत का माहौल है और मानव-हाथी संघर्ष का खतरा काफी बढ़ गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने पैलंग और सपरूम होते हुए बंगाल की ओर जाने वाले ग्रामीणों और राहगीरों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।

शाम होते ही मुख्य सड़क पर आ रहे हैं हाथी

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हाथियों का यह झुंड लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि शाम ढलते ही ये हाथी जंगल से निकलकर मुख्य सड़क के आसपास आ जाते हैं और सुबह तक यहीं डटे रहते हैं। ऐसे में पैलंग-सपरूम मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों और स्थानीय लोगों के लिए खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया है। विभाग ने आशंका जताई है कि जरा सी लापरवाही से कभी भी इंसान और हाथी के बीच हिंसक टकराव की स्थिति बन सकती है।

ग्रामीणों के लिए वन विभाग की जरूरी हिदायत

हाथियों के खतरे को देखते हुए वन विभाग ने ग्रामीणों और राहगीरों के लिए गाइडलाइन जारी की है:

  • अकेले सफर न करें: रात के समय जंगल या सड़क के किनारे अकेले आवाजाही करने से पूरी तरह बचें।
  • सुरक्षा उपकरण साथ रखें: यदि रात में निकलना बहुत जरूरी हो, तो अपने साथ तेज रोशनी वाली टॉर्च, पटाखे और मशाल जरूर रखें।
  • दूरी बनाएं रखें: अचानक हाथी सामने दिखने पर घबराएं नहीं, न ही शोर मचाकर उन्हें भड़काने की कोशिश करें। हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
  • तुरंत सूचना दें: हाथी दिखने पर इसकी जानकारी तुरंत वन विभाग की टीम या स्थानीय प्रशासन को दें।

पूरे राज्य में गंभीर हुई हाथियों की समस्या

सरायकेला ही नहीं, बल्कि झारखंड के कई अन्य जिलों में भी इन दिनों हाथियों के झुंड के कारण आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। हाथियों द्वारा फसलों को रौंदने, घरों को ध्वस्त करने और जान-माल को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। चांडिल क्षेत्र में भी पिछले कुछ दिनों से हाथियों की गतिविधियां अचानक बहुत तेज हो गई हैं।

वन विभाग रख रहा है नजर: फिलहाल, वन विभाग की टीम सपरूम जंगल और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त कर रही है। हाथियों की सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए ड्रोन की मदद ली जा रही है, साथ ही ‘हाथी मित्र दल’ के जरिए प्रभावित गांवों में लगातार मुनादी कराकर ग्रामीणों को अलर्ट किया जा रहा है।

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