रिम्स में शुरू होगी ‘पेड वीआईपी हेल्थ चेकअप’ सुविधा, एक ही जगह मिलेगी बेसिक से होल बॉडी जांच

रिम्स में शुरू होगी ‘पेड वीआईपी हेल्थ चेकअप’ सुविधा, एक ही जगह मिलेगी बेसिक से होल बॉडी जांच

Johar News Times
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रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में जल्द ही पेड स्पेशल हेल्थ चेकअप सुविधा शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत मरीजों को एक ही परिसर में बेसिक जांच से लेकर होल बॉडी स्कैन तक की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए प्रारंभिक रूप से पेइंग वार्ड को केंद्र बनाया जाएगा, जहां जांच लैब और चिकित्सकीय परामर्श एक साथ उपलब्ध होंगे। रिम्स प्रबंधन का कहना है कि यह पहल बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता और समय रहते बीमारी की पहचान की जरूरत को देखते हुए की जा रही है। रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार के अनुसार, लोग अब बीमारी होने के बाद नहीं, बल्कि पहले ही जांच कराकर सतर्क रहना चाहते हैं। इसी मांग को देखते हुए इस सुविधा पर काम तेज किया गया है।

इस प्रस्तावित व्यवस्था में तीन स्तर पर जांच की सुविधा होगी। इसमें बेसिक हेल्थ चेकअप, आवश्यकता आधारित विशेष जांच और होल बॉडी स्कैन शामिल हैं। जरूरत पड़ने पर हार्ट, ब्रेन, स्पाइन, एमआरआई, सीटी स्कैन और अन्य उन्नत जांच भी उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं पूर्ण शरीर की विस्तृत स्क्रीनिंग के लिए होल बॉडी चेकअप पैकेज भी होगा।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों को जांच के लिए अलग-अलग विभागों और लैब में नहीं जाना पड़ेगा। सैंपल कलेक्शन, जांच और चिकित्सकीय परामर्श एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगे। इसके लिए पेइंग वार्ड के ग्राउंड फ्लोर पर विशेष काउंटर, लैब और परामर्श कक्ष विकसित किए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, इस सुविधा का उद्देश्य संस्थान की आय बढ़ाना नहीं है, बल्कि मरीजों को वास्तविक लागत पर बेहतर और त्वरित जांच सुविधा उपलब्ध कराना है। वर्तमान में निजी अस्पतालों में होल बॉडी चेकअप के लिए हजारों से लेकर लाखों रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं, जबकि रिम्स में यह सुविधा अपेक्षाकृत कम लागत पर मिलेगी।

रिम्स का यह कदम उन बीमारियों की शुरुआती पहचान में मदद करेगा, जो अक्सर देर से पता चलती हैं। इसमें डायबिटीज, हृदय रोग, कैंसर, ब्रेन स्ट्रोक और किडनी संबंधी बीमारियां प्रमुख हैं। नियमित स्क्रीनिंग से इन रोगों को शुरुआती चरण में पकड़ने में मदद मिलेगी।

हालांकि वर्तमान में रिम्स में अधिकांश पैथोलॉजिकल और रेडियोलॉजिकल जांच उपलब्ध हैं, लेकिन मरीजों को अलग-अलग विभागों और भवनों में भटकना पड़ता है। नई व्यवस्था से यह प्रक्रिया एक ही स्थान पर सुलभ हो सकेगी। इसी बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जब एकीकृत जांच व्यवस्था पेड सुविधा के रूप में संभव हो रही है, तो सामान्य मरीजों के लिए ऐसी सुविधा अब तक पूरी तरह लागू क्यों नहीं हो पाई है। इससे आने वाले समय में संस्थान की मौजूदा व्यवस्था को लेकर भी बहस तेज होने की संभावना है।

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