झरिया कोयलांचल में बड़ा धमाका: खदानों से जल्द निकलेगी ‘कोल बेड मीथेन’ गैस, गैस स्टेशन का काम अंतिम चरण में

"कोयले की परतों से निकलेगी देश की तरक्की: झरिया-बोकारो में शुरू होने जा रहा है CBM का महाप्रोजेक्ट, खदानें होंगी सुरक्षित।"

Johar News Times
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धनबाद/बोकारो: झारखंड के कोयलांचल क्षेत्र के लिए एक बेहद अच्छी और बड़ी खबर है। बहुप्रतीक्षित झरिया कोल बेड मीथेन परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। परियोजना के तहत निर्माणाधीन गैस कलेक्शन स्टेशन का काम युद्धस्तर पर पूरा किया जा रहा है। इसके शुरू होते ही कोयले की परतों से निकलने वाली मीथेन गैस का कमर्शियल इस्तेमाल शुरू हो जाएगा, जिससे क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा के एक नए युग की शुरुआत होगी।

यह महत्वाकांक्षी परियोजना धनबाद और बोकारो के विस्तृत कोयला क्षेत्र में फैली हुई है, जिसका विकास ओएनजीसी और कोल इंडिया लिमिटेड के संयुक्त उपक्रम द्वारा किया जा रहा है।

टॉप लेवल पर मॉनिटरिंग, सीएमडी खुद रख रहे नजर

केंद्रीय कोयला मंत्रालय इस प्रोजेक्ट की लगातार निगरानी कर रहा है। बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल स्वयं इसकी प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं। हाल ही में परियोजना की समीक्षा के लिए सीएमपीडीआई और कोल इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने बोकारो स्थित ओएनजीसी एसेट का दौरा कर जमीनी हकीकत का जायजा लिया था। इस प्रोजेक्ट में ‘सीएमपीडीआई’ तकनीकी सलाहकार की भूमिका निभा रहा है।

दोहरा फायदा: मिलेगी क्लीन एनर्जी और टलेगा खदान हादसों का खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, कोल बेड मीथेन का दोहन सिर्फ ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दो सबसे बड़े फायदे हैं:

  1. सुरक्षित खदानें: कोयला खदानों के भीतर मीथेन गैस के जमाव से अक्सर बड़े विस्फोट और हादसे होते हैं। इस तकनीक से गैस पहले ही निकाल ली जाएगी, जिससे खदानें सुरक्षित होंगी।
  2. पर्यावरण संरक्षण: मीथेन एक अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन है। इसके उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी, जो पर्यावरण के लिए बेहद फायदेमंद है।

क्या है कोल बेड मीथेन ?

कोल बेड मीथेन वह प्राकृतिक गैस है, जो लाखों वर्षों से कोयले की परतों के भीतर फंसी रहती है। विशेष ड्रिलिंग तकनीक की मदद से इस गैस को बाहर निकाला जाता है। इसका उपयोग बिजली उत्पादन, भारी उद्योगों, सीएनजी वाहनों और घरेलू एलपीजी के विकल्प के रूप में किया जा सकता है।

CBM परियोजना से होने वाले 5 मुख्य लाभ:

  • सुरक्षा में सुधार: खदानों में गैस रिसाव और अचानक होने वाले विस्फोटों का खतरा खत्म होगा।
  • प्रदूषण पर लगाम: पर्यावरण में मीथेन के अनियंत्रित और सीधे उत्सर्जन को रोका जा सकेगा।
  • मल्टीपर्पज ईंधन: बिजली उत्पादन, परिवहन और घरेलू उपयोग के लिए सस्ता व स्वच्छ ईंधन मिलेगा।
  • जीरो कार्बन मिशन: कार्बन फुटप्रिंट को कम कर भारत के स्वच्छ ऊर्जा संकल्प को मजबूती मिलेगी।
  • आत्मनिर्भर भारत: विदेशी गैस और ईंधन पर देश की निर्भरता कम होगी और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी।

झरिया कोयलांचल में इस सीबीएम परियोजना के शुरू होने के बाद न केवल देश के औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और तकनीक के नए रास्ते भी खुलेंगे।

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