झारखंड हाई कोर्ट ने राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान की अधिग्रहित जमीन की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। गुरुवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने साफ किया कि रिम्स की जमीन पर किसी भी कीमत पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अदालत ने रांची के एसएसपी को सख्त निर्देश दिया है कि रिम्स की चारदीवारी निर्माण कार्य को बिना किसी बाधा के पूरा कराने के लिए तत्काल पर्याप्त पुलिस बल मुहैया कराया जाए।
कोर्ट की नाराजगी: हटाया गया अतिक्रमण फिर वापस आया!
सुनवाई के दौरान कोर्ट को अवगत कराया गया कि हाई कोर्ट के पिछले आदेश के बाद रिम्स की जमीन से जिस अतिक्रमण को हटाया गया था, वहां भू-माफियाओं और स्थानीय लोगों द्वारा दोबारा कब्जा किया जा रहा है। इतना ही नहीं, असामाजिक तत्वों द्वारा रिम्स की बनाई जा रही चारदीवारी को बार-बार तोड़ा और क्षतिग्रस्त किया जा रहा है।
इस पर गहरी नाराजगी जताते हुए खंडपीठ ने कहा कि रिम्स की अधिग्रहित भूमि की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाए और बाउंड्री का काम रुकना नहीं चाहिए।
रिक्त पदों और मेडिकल उपकरणों की सुस्त रफ्तार पर भी फटकार
जमीन के अलावा, हाई कोर्ट ने रिम्स की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी प्रबंधन को आड़े हाथों लिया। रिम्स प्रशासन की ओर से डॉक्टरों व कर्मियों के रिक्त पदों पर नियुक्ति और नए चिकित्सा उपकरणों की खरीद को लेकर एक शपथ पत्र दाखिल किया गया था, जिससे अदालत संतुष्ट नहीं दिखी।
कोर्ट की टिप्पणी: खंडपीठ ने कहा कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के तहत खाली पदों को जल्द से जल्द भरा जाए और जरूरी मेडिकल उपकरणों की खरीद प्रक्रिया तेज कर इसकी पूरी रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की जाए।
अगली सुनवाई 23 जुलाई को
मामले की सुनवाई के दौरान रांची नगर निगम के उन अधिकारियों द्वारा दायर हस्तक्षेप याचिकाओं को अदालत ने स्वीकार कर लिया, जिनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। हाई कोर्ट अब इस पूरे मामले पर 23 जुलाई को अगली सुनवाई करेगा।
