असम में बकरीद पर गाय की कुर्बानी न करने की मुस्लिम कमेटियों की अपील, हिमंत बिस्वा सरमा ने किया स्वागत

असम में बकरीद पर गाय की कुर्बानी न करने की मुस्लिम कमेटियों की अपील, हिमंत बिस्वा सरमा ने किया स्वागत

Johar News Times
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गुवाहाटी। बकरीद को लेकर असम के कई मुस्लिम संगठनों और ईदगाह/कब्रिस्तान कमेटियों ने इस वर्ष त्योहार के दौरान गाय की कुर्बानी न करने की अपील की है। होजाई, धुबरी, बोंगाईगांव और उधारबंद सहित कई क्षेत्रों की कमेटियों ने यह संयुक्त आग्रह जारी किया है। कमेटियों ने स्पष्ट किया है कि इस्लाम में गाय की कुर्बानी अनिवार्य नहीं है और धार्मिक दृष्टि से अन्य जानवरों की कुर्बानी दी जा सकती है। साथ ही कहा गया कि असम में पारंपरिक रूप से गाय की उपलब्धता रही है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में सामाजिक सौहार्द को ध्यान में रखते हुए यह अपील की गई है।

23 मई 2026 को धुबरी टाउन ईदगाह कमेटी द्वारा जारी नोटिस में राज्य के मवेशी संरक्षण अधिनियम (Cattle Preservation Act) का हवाला दिया गया है। इसके तहत गाय की कुर्बानी पर कानूनी प्रतिबंध है और उल्लंघन करने पर 3 से 7 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

कमेटियों ने यह भी निर्देश दिया है कि कुर्बानी से जुड़ी तस्वीरें या वीडियो सोशल मीडिया पर साझा न किए जाएं और अवशेषों का सार्वजनिक प्रदर्शन न हो, ताकि किसी समुदाय की भावनाएं प्रभावित न हों।

इस पहल का असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने स्वागत किया है। उन्होंने इसे राज्य में शांति और भाईचारे को मजबूत करने वाला कदम बताते हुए अन्य कमेटियों से भी ऐसी अपील करने की उम्मीद जताई है।

इसी बीच दिल्ली प्रशासन ने भी बकरीद को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें प्रतिबंधित पशुओं के वध पर रोक और केवल निर्धारित स्थानों पर ही कुर्बानी देने की अनुमति शामिल है।

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