जमशेदपुर: राज क्लब गंडा समाज के अध्यक्ष नरेश कुमार टांडिया के नेतृत्व में शुक्रवार को गंडा समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपकर झारखंड में गंडा समाज को अविलंब अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने की पुरजोर मांग की है।
120 वर्षों से रह रहे, पर मूल अधिकारों से वंचित
मीडिया को जानकारी देते हुए समाज के अध्यक्ष नरेश कुमार टांडिया ने कहा कि गंडा समाज के लोग झारखंड के कई जिलों में पिछले 115 से 120 वर्षों से बसे हुए हैं। टाटा कंपनी की स्थापना के समय से ही यहाँ उनकी छठी और सातवीं पीढ़ी रह रही है। राज्य में उनकी आबादी लगभग 1,50,000 (डेढ़ लाख) है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा:
“हमें वोट देने और सरकार चुनने का अधिकार तो मिला है, लेकिन जो हमारा मूल अधिकार है— अनुसूचित जाति का दर्जा— उससे हमें अब तक वंचित रखा गया है।”
पड़ोसी राज्यों में दर्जा, तो झारखंड में क्यों नहीं?
प्रतिनिधिमंडल ने तर्क दिया कि ओड़िसा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों में गंडा जाति को अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है। जब इन राज्यों में यह व्यवस्था लागू है, तो झारखंड में इसे क्यों अटकाया गया है? उन्होंने कहा कि बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य बने 26 वर्ष बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
युवाओं के भविष्य पर संकट, आंदोलन की चेतावनी
जाति प्रमाण पत्र न बनने के कारण गंडा समाज के बच्चों और युवाओं को शिक्षा व सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है। समाज ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि झारखंड सरकार उनकी इस मांग को जल्द पूरा नहीं करती है, तो पूरा गंडा समाज अपने हक और अधिकार के लिए सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगा।
प्रतिनिधिमंडल में ये लोग थे शामिल
इस मौके पर भारी संख्या में गंडा समाज के महिला व पुरुष उपस्थित रहे। ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से नरेश कुमार टांडिया, फूलचंद राय, धर्मेंद्र दीप, हिरन दीप, कृपा नाग, मोतीलाल करन, सुक्रित सागर, शंकर टांडी, रवि महानन्द, सागर सोना, सोनू सोना, मनोज नाग, बलराम तांती, कार्तिक दीप, अरुण दीप, लक्ष्मी महानन्द तर, गणेश नाग, रथो हरपाल, प्रिया नाग, अंजलि तर, मदन कुमार विश्वास, नवीन कुमार, हेमन्त विस्वाल, सन्नी तांती, दिलीप कुमार सुना, श्याम बारीक और आनंद नाग आदि शामिल थे।
