दुबई/न्यूयॉर्क: पश्चिम एशिया के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्ध के बादल एक बार फिर गहरे हो गए हैं। ओमान के तट के पास एक बड़े मालवाहक जहाज पर हुए आत्मघाती ड्रोन हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी ने अपना महा-बचाव अभियान फिलहाल रोक दिया है। इस फैसले के बाद फारस की खाड़ी में फंसे करीब 11,000 अंतरराष्ट्रीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है।
गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र, ओमान और कई सदस्य देशों के सहयोग से पिछले कुछ दिनों से विशेष निकासी अभियान चलाया जा रहा था, ताकि क्षेत्रीय तनाव के कारण फंसे जहाजों और नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
सिंगापुर के जहाज ‘एवर लवली’ पर ड्रोन अटैक, बदले हालात
बचाव अभियान के बीच ही ओमान के तट के पास सिंगापुर के झंडे वाले एक बड़े कमर्शियल शिप ‘एवर लवली’ पर जोरदार ड्रोन हमला हुआ। इस हमले में जहाज के संचालन कक्ष को भारी नुकसान पहुंचा है, हालांकि गनीमत रही कि किसी नाविक की मौत या गंभीर रूप से घायल होने की खबर नहीं है।
इस घटना के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन को अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरे इलाके में फिलहाल 20 हजार से अधिक नाविक मौजूद हैं, जिनमें से 11 हजार को निकालने की तत्काल योजना थी, जो अब अधर में लटक गई है।
संयुक्त राष्ट्र ने क्यों लिया अभियान रोकने का फैसला?
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज ने स्पष्ट किया कि जब तक निकासी सूची में शामिल सभी जहाजों की सुरक्षा की 100% गारंटी नहीं मिल जाती, तब तक अभियान को आगे बढ़ाना नाविकों की जान जोखिम में डालना होगा। हालांकि, जिस ‘एवर लवली’ जहाज पर हमला हुआ, वह यूएन के आधिकारिक रेस्क्यू मिशन का हिस्सा नहीं था, लेकिन इस हमले ने साबित कर दिया है कि यह समुद्री गलियारा फिलहाल पूरी तरह असुरक्षित है।
ईरान की कड़क चेतावनी से बढ़ा वैश्विक संकट
इस ड्रोन हमले से कुछ घंटे पहले ही ईरान ने एक बेहद सख्त चेतावनी जारी की थी। ईरान की नई ‘पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ ने साफ कहा कि उसकी अनुमति के बिना कोई भी जहाज संयुक्त राष्ट्र और ओमान द्वारा तय किए गए नए समुद्री मार्ग का इस्तेमाल न करे। ईरान ने चेतावनी दी है कि जो जहाज ईरानी जलक्षेत्र के आधिकारिक नियमों को छोड़कर दूसरे रास्ते पर जाएंगे, उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी ईरान की नहीं होगी।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल के बाजार पर असर की आशंका
रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह लाइफलाइन रूट है, जहां से वैश्विक तेल का एक-तिहाई हिस्सा गुजरता है। यदि यहां तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर वैश्विक समुद्री व्यापार, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे ईंधन की कीमतें एक बार फिर आसमान छू सकती है ।
