झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने या तैयार कराने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी उपायुक्त-सह-जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को ऐसे मामलों में कानून के तहत तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। साथ ही राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े सभी प्रमुख सवालों और शंकाओं का समाधान भी किया गया।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि एसआईआर के दौरान मतदाताओं को विभिन्न दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ सकती है। इस बीच पाकुड़ और गढ़वा से फर्जी प्रमाणपत्र तैयार किए जाने की शिकायतें मिली हैं। ऐसे मामलों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं के तहत त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एसआईआर के दौरान जमा होने वाले सभी दस्तावेजों के सत्यापन की जिम्मेदारी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों की होगी। लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी परिस्थिति में फर्जी या अनधिकृत दस्तावेज न बनवाएं और न ही ऐसे प्रयासों का हिस्सा बनें। इस संबंध में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने गुरुवार को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर एसआईआर प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्रस्तुतीकरण (पीपीटी) के माध्यम से राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए विभिन्न सवालों का जवाब दिया और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि इस विशेष पुनरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में शामिल न हो।
जानिए एसआईआर का पूरा शेड्यूल
- 29 जून तक प्रशिक्षण और आवश्यक सामग्री का मुद्रण पूरा होगा।
- 30 जून से 29 जुलाई तक बीएलओ घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित और संग्रह करेंगे।
- 29 जुलाई तक मतदान केंद्रों का युक्तिकरण पूरा किया जाएगा।
- 5 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होगी।
- 4 सितंबर तक दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी।
- 7 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
घर-घर जाकर होगा सर्वे
30 जून से शुरू होने वाले गणना चरण में बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) प्रत्येक घर जाकर पहले से आंशिक रूप से भरे हुए गणना प्रपत्र की दो प्रतियां उपलब्ध कराएंगे। यदि किसी घर पर ताला मिलता है, तो बीएलओ को कम से कम तीन बार वहां जाना अनिवार्य होगा। शुरुआती चरण में मतदान केंद्रों पर कैंप नहीं लगाए जाएंगे और पूरी प्रक्रिया घर-घर जाकर ही पूरी की जाएगी।
दस्तावेजों की जरूरत होगी कम
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि मतदाताओं को कम से कम दस्तावेज जमा करने पड़ें, इसके लिए सेल्फ और पैरेंटल मैपिंग की जा रही है। जिन मतदाताओं का नाम पिछले एसआईआर रिकॉर्ड में पहले से दर्ज है, उन्हें अतिरिक्त दस्तावेज देने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अलावा सांसद, विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक तथा सिविल और सैन्य सेवाओं के वरिष्ठ अधिकारियों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर उनका सत्यापन किया जाएगा। मैपिंग के दौरान सामने आने वाली 15 प्रकार की संभावित विसंगतियों को दूर करने के लिए बीएलओ को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है।
