घाटशिला: पूर्व विधायक एवं आदिवासी जननेता स्वर्गीय कॉमरेड बास्ता सोरेन की पुण्यतिथि पर उनके पैतृक गांव झापड़ीशोल में श्रद्धांजलि सभा, विचार गोष्ठी और सड़क नामकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गांव की मुख्य सड़क का नाम “कॉमरेड बास्ता सोरेन पथ” रखा गया और शिलापट्ट का अनावरण ग्राम प्रधान पीतांबर सोरेन ने किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने भाग लिया। इस दौरान “कॉमरेड बास्ता सोरेन अमर रहें” के नारों के साथ उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। स्व. बास्ता सोरेन की पुत्रवधु एवं समाजसेवी डॉ. सुनीता सोरेन ने कहा कि उनके विचारों और संघर्षों को आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने बताया कि ग्रामसभा के निर्णय से गांव की सड़क का नाम उनके नाम पर रखा गया है, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी उनके योगदान को याद रखेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि पेसा कानून के प्रारूप को तैयार करने में स्व. बास्ता सोरेन की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी, इसलिए उनकी पुण्यतिथि पर पेसा कानून आधारित सेमिनार का आयोजन भी किया गया।
घाटशिला में आयोजित विचार गोष्ठी में एमजीएम के उपाधीक्षक डॉ. नारायण उरांव ने पेसा कानून, आदिवासी अधिकारों और ग्रामसभा की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने स्व. बास्ता सोरेन के आदर्शों और सामाजिक सरोकारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर डॉ. देवदूत सोरेन, ओम प्रकाश सिंह, बी.एन. सिंहदेव, भुनेश्वर तिवारी, रामदास हांसदा, गणेश मुर्मू, पार्वती मुर्मू, ज्योति मलिक, शेखर मलिक, सुब्रत दास, डॉ. आर.के. चौधरी, साधूचरण पाल, साधना पाल, संजना मुर्मू, गुरुवारी सोरेन समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।
