गुड़ाबांदा : फॉरेस्ट ब्लॉक पंचायत के माछभंडार गांव स्थित पांडारशोली से छोलागोड़ा टोला तक सड़क की बदहाल स्थिति से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन का इंतजार छोड़ खुद ही सड़क निर्माण का जिम्मा उठा लिया। वर्षों से जर्जर और कीचड़युक्त रास्ते से जूझ रहे ग्रामीणों ने श्रमदान और आपसी सहयोग से करीब दो किलोमीटर लंबी मुरूम सड़क की मरम्मत कर एक मिसाल कायम की है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण को लेकर जिला परिषद, प्रखंड कार्यालय और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को कई बार लिखित आवेदन दिए गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। लगातार अनदेखी के कारण लोगों को रोजाना भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
सबसे अधिक दिक्कत स्कूली बच्चों को हो रही थी। बारिश के दौरान सड़क दलदल में बदल जाती थी, जिससे बच्चों का स्कूल आना-जाना मुश्किल हो जाता था। ग्रामीणों का कहना है कि जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्होंने स्वयं पहल करने का निर्णय लिया। गांव में बैठक कर लोगों ने चंदा जुटाया, मुरूम की व्यवस्था की और सामूहिक श्रमदान शुरू किया। युवाओं, बुजुर्गों और अन्य ग्रामीणों ने मिलकर सड़क की मरम्मत का कार्य पूरा किया। ग्रामीणों की इस पहल की इलाके में सराहना हो रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि फिलहाल मरम्मत की गई इस सड़क को जल्द ही पक्की सड़क में तब्दील किया जाए, ताकि लोगों को स्थायी राहत मिल सके। उनका कहना है कि बुनियादी सुविधाओं के लिए जनता को बार-बार खुद आगे आने की नौबत नहीं आनी चाहिए। ग्रामीणों की इस पहल ने एक बार फिर विकास कार्यों में प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं सामुदायिक एकजुटता और आत्मनिर्भरता की मजबूत मिसाल भी पेश की ।
