ब्रिटिश दौर की धरोहर को फिर मिलेगी पहचान? मऊभंडार गोल्फ कोर्स पर एचसीएल का फोकस

ब्रिटिश दौर की धरोहर को फिर मिलेगी पहचान? मऊभंडार गोल्फ कोर्स पर एचसीएल का फोकस

Johar News Times
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एचसीएल के सीएमडी संजीव कुमार सिंह ने जताई पुनर्विकास की प्रतिबद्धता, 89 वर्ष पुरानी खेल विरासत के पुनर्जीवन की जगी उम्मीद

घाटशिला, पूर्वी सिंहभूम के मऊभंडार स्थित ऐतिहासिक गोल्फ कोर्स को एक बार फिर नई पहचान मिलने की उम्मीद जगी है। हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (सीएमडी) संजीव कुमार सिंह ने संकेत दिया है कि कंपनी इस विरासत स्थल के संरक्षण और विकास को लेकर गंभीर है। उनके इस बयान के बाद मऊभंडार और घाटशिला क्षेत्र में गोल्फ कोर्स के भविष्य को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

कोलकाता के प्रतिष्ठित रॉयल कोलकाता गोल्फ क्लब में आयोजित एमजीएमआई प्रेसिडेंट्स कप गोल्फ टूर्नामेंट-2026 के दौरान सीएमडी ने कहा कि मऊभंडार स्थित इंडियन कॉपर कॉम्प्लेक्स (आईसीसी) के ऐतिहासिक गोल्फ कोर्स के पुनर्जीवन और विकास के लिए कंपनी प्रतिबद्ध है। इस बयान को क्षेत्र की खेल विरासत के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

करीब 89 वर्ष पुराना यह गोल्फ कोर्स वर्ष 1937 से 1940 के बीच ब्रिटिश शासनकाल में विकसित किया गया था। लगभग 30 एकड़ में फैला नौ होल वाला यह मैदान उस दौर में इंडियन कॉपर कॉरपोरेशन के अधिकारियों और विदेशी कर्मचारियों का प्रमुख खेल केंद्र हुआ करता था। समय के साथ इसकी पहचान पूर्वी भारत के प्रतिष्ठित गोल्फ कोर्सों में शामिल हो गई थी।

मऊभंडार गोल्फ क्लब ने अपने स्वर्णिम दौर में कई प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं की मेजबानी की। यहां होल्मन चैलेंज कप, गिलैंडर्स कप और टाइगर्स ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट आयोजित होते थे, जिनमें कोलकाता, पटना, रांची और जमशेदपुर सहित विभिन्न शहरों के खिलाड़ी हिस्सा लेते थे। वर्ष 1952 में क्लब ने पहली बार होल्मन चैलेंज कप अपने नाम किया था, जबकि 1956, 1957 और 1958 में लगातार तीन वर्षों तक यह ट्रॉफी जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई थी।

हालांकि तांबा उद्योग में आई आर्थिक चुनौतियों और बदलती प्राथमिकताओं के कारण गोल्फ कोर्स का रखरखाव प्रभावित होता गया। धीरे-धीरे खेल गतिविधियां कम होती गईं और कभी खिलाड़ियों से गुलजार रहने वाला परिसर उपेक्षा का शिकार बन गया। इसके अलावा स्वर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना की नहर गुजरने से गोल्फ कोर्स का मूल स्वरूप भी प्रभावित हुआ, जिससे इसके पुनर्विकास की राह और चुनौतीपूर्ण हो गई।

खेल विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इस गोल्फ कोर्स का आधुनिक स्वरूप में पुनर्विकास किया जाता है, तो घाटशिला-मऊभंडार क्षेत्र खेल पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर सकता है। स्वर्णरेखा नदी, प्राकृतिक पहाड़ियों और हरियाली से घिरा यह इलाका राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों और पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखता है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और खेल अवसरों का भी विस्तार होगा। एचसीएल प्रबंधन की ओर से मिले सकारात्मक संकेतों के बाद अब स्थानीय नागरिकों, पूर्व कर्मचारियों और खेल प्रेमियों की नजर कंपनी की आगामी कार्ययोजना पर टिकी है। लोगों को उम्मीद है कि कभी पूर्वी भारत की पहचान रहा मऊभंडार गोल्फ कोर्स एक बार फिर अपनी पुरानी गरिमा और प्रतिष्ठा हासिल कर सकेगा।

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