800 से ज्यादा अदालतों के मामलों से घिरा नगर विकास विभाग, अतिरिक्त अधिवक्ता की मांग

800 से ज्यादा अदालतों के मामलों से घिरा नगर विकास विभाग, अतिरिक्त अधिवक्ता की मांग

Johar News Times
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रांची, झारखंड के नगर विकास एवं आवास विभाग पर 800 से अधिक लंबित न्यायालयी मामलों का दबाव बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में विभाग के पास केवल एक रिटेनर अधिवक्ता होने के कारण समय पर जवाब, प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने और अदालतों में प्रभावी पैरवी करना चुनौती बन गया है। इसे देखते हुए विभाग ने महाधिवक्ता कार्यालय से एक अतिरिक्त रिटेनर अधिवक्ता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। विभाग से जुड़े मामलों में भूमि एवं अतिक्रमण विवाद, भवन नक्शा स्वीकृति, नगर निकायों के प्रशासनिक निर्णय, टेंडर और संविदा विवाद, नियुक्ति-प्रोन्नति, होल्डिंग टैक्स तथा शहरी विकास योजनाओं से संबंधित प्रकरण शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि समय पर पैरवी नहीं होने पर विभाग को प्रतिकूल न्यायालयी आदेशों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे विकास योजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।

नियम क्या कहते हैं?
विधि विभाग के 22 फरवरी 2022 के दिशा-निर्देशों के अनुसार 100 तक मामलों पर एक, 100 से 200 मामलों पर दो और 200 से अधिक मामलों पर अधिकतम तीन रिटेनर अधिवक्ताओं की नियुक्ति की जा सकती है।

क्यों बढ़ी समस्या?
वर्ष 2022 में विभाग को दो रिटेनर अधिवक्ता अमृत राज किस्कू और ऋषि चंदन उपलब्ध कराए गए थे। बाद में ऋषि चंदन के बिहार न्यायिक सेवा में जिला जज बनने के बाद अप्रैल 2025 में इस्तीफा देने से विभाग में केवल अमृत राज किस्कू ही रह गए। तब से सभी न्यायालयी मामलों की जिम्मेदारी उन्हीं पर है।

अतिरिक्त अधिवक्ता की मांग

विभाग के अपर सचिव जुल्फिकार अली ने महाधिवक्ता को पत्र लिखकर बताया है कि 800 से अधिक लंबित मामलों के कारण न्यायालयी कार्यों का दबाव काफी बढ़ गया है। उन्होंने मामलों की प्रभावी पैरवी, समय पर प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने और न्यायालयी कार्रवाई में तेजी लाने के लिए एक अतिरिक्त रिटेनर अधिवक्ता की नियुक्ति का अनुरोध किया है।

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