सरायकेला: रावताड़ा बाईपास पर बाल-बाल बचे पति-पत्नी, आयरन लोडेड ट्रक ने बाइक को कुचला; आक्रोशित ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

Johar News Times
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सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल थाना अंतर्गत NH-32 न्यू बाईपास पर मंगलवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। रावताड़ा में निर्माणाधीन फ्लाईओवर के पास एक अनियंत्रित आयरन लोडेड ट्रक ने बाइक को बुरी तरह कुचल दिया। गनीमत रही कि बाइक सवार दंपती ने समय रहते कूदकर अपनी जान बचा ली खूंटी गांव (चौका थाना क्षेत्र) निवासी मनोज रजक अपनी पत्नी दीपिका देवी के साथ बाइक (JH 22 J 7174) से नीमडीह स्थित अपने ससुराल जा रहे थे। रावताड़ा बाईपास पर जैसे ही वे पहुंचे, ओडिशा नंबर के एक आयरन लोडेड ट्रक (OD 09 N 3319) ने अचानक बैक करना शुरू कर दिया।

ट्रक चालक की लापरवाही से बाइक ट्रक के पिछले पहिये के नीचे आ गई और पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। पीड़ित मनोज रजक ने बताया, “हमने हॉर्न बजाकर सचेत करने की कोशिश की, लेकिन ट्रक चालक ने बिना देखे पीछे गाड़ी बढ़ा दी। अगर हम तुरंत नहीं कूदते, तो आज जिंदा नहीं बचते।” हादसे के बाद मौके पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका आरोप है कि पितकी गेट के पास अधूरा पड़ा फ्लाईओवर और भारी वाहनों की मनमानी आवाजाही के कारण यह सड़क ‘डेथ जोन’ बन गई है। आक्रोशित ग्रामीण ट्रक मालिक को मौके पर बुलाने और पीड़ित दंपती को नई बाइक मुआवजे के रूप में देने की मांग कर रहे थे।

‘अधूरा निर्माण बन रहा काल’

स्थानीय निवासियों का कहना है कि:

  • अधूरा फ्लाईओवर: निर्माण कार्य लंबा खिंचने के कारण लिंक रोड पर वाहनों का भारी दबाव है।
  • अव्यवस्था: ओडिशा से आने वाले आयरन लदे ट्रकों के कारण अक्सर यहां घंटों जाम लगता है और आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं।
  • प्रशासनिक सुस्ती: सड़क की बदहाल स्थिति और भारी वाहनों की गति पर नियंत्रण न होने से आम लोगों का चलना दूभर हो गया है।

पुलिस की कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही चांडिल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। ट्रक चालक ने अपनी सफाई में कहा कि “बैक कैमरा में बाइक नहीं दिखी और आवाज सुनते ही ब्रेक लगा दिया था।” फिलहाल पुलिस ने दोनों वाहनों को अपने कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। ग्रामीणों और राहगीरों ने केंद्र सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि अधूरे फ्लाईओवर का कार्य जल्द से जल्द पूरा कराया जाए और भारी वाहनों के परिचालन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि किसी की जान जोखिम में न पड़े।

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