झारखंड और ओडिशा की सीमा पर स्थित और प्राकृतिक सुंदरता से सराबोर ‘तिरिंग घाटी’ को जल्द ही एक भव्य पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। पोटका विधानसभा क्षेत्र के हाता-तिरिंग मेन रोड स्थित उड़ीसा बॉर्डर से महज 100 मीटर दूर, बनकटा गांव के तिरिंग घाटी काली मंदिर क्षेत्र को नया स्वरूप देने की तैयारी शुरू हो गई है।
रविवार को स्थानीय विधायक संजीव सरदार ने अपनी टीम के साथ इस पूरे मनोरम क्षेत्र का सघन निरीक्षण किया और यहां पर्यटन की संभावनाओं का जायजा लिया। इस पहल के बाद सीमावर्ती इलाकों के ग्रामीणों और युवाओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
हर साल जुटते हैं झारखंड-ओडिशा के हजारों लोग, जल्द बनेगा मास्टर प्लान
स्थल निरीक्षण के दौरान विधायक संजीव सरदार ने कहा कि तिरिंग घाटी क्षेत्र प्रकृति की अनमोल गोद में बसा है। यहाँ हर साल विशेषकर नए साल और छुट्टियों के मौके पर झारखंड और ओडिशा से हजारों की संख्या में लोग सपरिवार पिकनिक मनाने और घूमने पहुंचते हैं।
“इस क्षेत्र को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने के लिए जल्द ही वन विभाग को एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा जा रहा है। चूंकि दोनों राज्यों के लोगों के पारिवारिक और सामाजिक संबंध इस सीमावर्ती क्षेत्र से गहरे जुड़े हैं, इसलिए यहां आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विकास होना बेहद जरूरी है।” — संजीव सरदार, विधायक ,पोटक)
रोजगार की बहेगी बयार, मजबूत होगी स्थानीय अर्थव्यवस्था
इस घाटी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के पीछे सरकार का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि रोजगार सृजन भी है। झारखंड-ओडिशा बॉर्डर पर स्थित होने के कारण इस स्थल के विकसित होने से:
- स्थानीय युवाओं को रोजगार और गाइड जैसे नए अवसर मिलेंगे।
- स्थानीय हस्तशिल्प, होटल-खानपान और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों की आय में भारी वृद्धि होगी।
- बॉर्डर पर बसे गांवों के लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
बच्चों के लिए पार्क और पिकनिक स्पॉट: पोटका को एक और ‘तोहफा’
विधायक ने प्रस्तावित योजनाओं की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि इस पर्यटन स्थल में परिवारों और बच्चों की सुरक्षा और मनोरंजन का पूरा ख्याल रखा जाएगा।
- बच्चों के खेलने के लिए आधुनिक व्यवस्था, सुरक्षित पिकनिक स्पॉट, पर्यटकों के बैठने के लिए शेड और प्राकृतिक वातावरण के अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा।
स्थानीय ग्रामीणों ने विधायक की इस दूरदर्शी सोच की सराहना करते हुए कहा कि तिरिंग घाटी को पहचान मिलने से इस पिछड़े सीमावर्ती इलाके की तकदीर और तस्वीर दोनों बदल जाएगी।
