स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड अपने संयंत्रों की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से डिजिटल और हाईटेक बनाने जा रही है। कंपनी ने बोकारो स्टील प्लांट समेत भिलाई, दुर्गापुर, इस्को बर्नपुर, राउरकेला और अपनी विभिन्न खदानों में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवानों और अधिकारियों की संख्या में कटौती करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस सिलसिले में SAIL मुख्यालय ने CISF के महानिदेशक को एक पत्र भेजकर समीक्षा बैठक का समय मांगा है।
कई यूनिट्स से खत्म हो सकता है DIG का पद
वर्तमान नियमों के मुताबिक, बोकारो, भिलाई, दुर्गापुर और राउरकेला जैसे बड़े प्लांट्स में 1,500 से अधिक CISF कर्मी तैनात हैं, जिसके कारण यहाँ डीआईजी स्तर के अधिकारी कमान संभालते हैं। लेकिन नए सुरक्षा मॉडल के तहत यदि जवानों की संख्या घटाकर 1,000 से 1,200 के बीच की जाती है, तो इन इकाइयों से DIG का पद स्वतः समाप्त हो जाएगा। ऐसे में सुरक्षा की जिम्मेदारी सीनियर कमांडेंट या कमांडेंट स्तर के अधिकारियों के पास होगी।
भिलाई चोरी कांड के बाद बढ़ी सख्ती
हाल ही में भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) में करोड़ों रुपये के लौह स्क्रैप की बड़ी चोरी का खुलासा हुआ था। स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 250 टन स्क्रैप, हाइवा, ट्रक और करीब 3.33 करोड़ रुपये की मशीनरी जब्त की थी। इस मामले में मुख्य आरोपी संजय सिंह समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इस घटना ने प्लांट्स की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
चोरी रुकेगी और खर्च भी घटेगा
SAIL प्रबंधन का मानना है कि CISF कर्मियों के वेतन और रख-रखाव पर हर महीने करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, इसके बावजूद कई इकाइयों से स्क्रैप और लोहे की चोरी की खबरें आती रहती हैं। अब कंपनी तकनीक और मैनपावर के बीच एक नया संतुलन बनाने जा रही है।
इन आधुनिक तकनीकों पर रहेगा जोर:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस : संदिग्ध गतिविधियों को भांपने के लिए स्मार्ट सर्विलांस।
- ड्रोन विंग: पूरे प्लांट और खदानों के चप्पे-चप्पे पर हवाई नजर रखने के लिए।
- RFID सिस्टम व हाईटेक CCTV: वाहनों और कर्मियों की सटीक ट्रैकिंग के लिए।
अध्ययन और समीक्षा बैठक के बाद इस नए सुरक्षा मॉडल को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिससे सेल को अपनी परिचालन लागत घटाने में बड़ी मदद मिलेगी।
