लातेहार: बालूमाथ में ‘उत्तरी धाधु’ कोयला खदान शुरू होने से पहले भारी बवाल, ग्रामीणों के चौतरफा विरोध के कारण जनसुनवाई स्थगित

एनटीपीसी माइनिंग प्रोजेक्ट को लेकर आर-पार के मूड में रैयत; जिला परिषद उपाध्यक्ष और विस्थापित नेताओं ने प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा।

Johar News Times
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झारखंड के लातेहार जिले के बालूमाथ प्रखंड में ‘उत्तरी धाधु’ कोयला खदान के विकास का कार्य तेजी पर है। यह राज्य की एक बेहद महत्वपूर्ण वाणिज्यिक परियोजना है, जिसे दो प्रमुख ब्लॉकों—उत्तरी धाधु पूर्वी भागऔर उत्तरी धाधु पश्चिमी भाग के रूप में विकसित किया जा रहा है। जहां एक ओर कंपनियां इसे जल्द चालू करने की कवायद में हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय ग्रामीणों और रैयतों के भारी विरोध के कारण टकराव की स्थिति पैदा हो गई है।

ग्रामीणों के भारी हंगामे के कारण प्रशासन को पीछे हटना पड़ा

इसी क्रम में सोमवार, 1 जून को बालूमाथ प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड को आवंटित ‘नॉर्थ धाधु ईस्टर्न पार्ट कोल माइनिंग प्रोजेक्ट’ के लिए एक महत्वपूर्ण जनसुनवाई का आयोजन किया गया था। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद द्वारा पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए बुलाई गई इस लोक जनसुनवाई को ग्रामीणों के भारी और चौतरफा विरोध के कारण जिला प्रशासन को मजबूरन स्थगित करना पड़ा।

जैसे ही जनसुनवाई की प्रक्रिया शुरू हुई, प्रभावित पंचायतों से आए सैकड़ों ग्रामीणों ने स्थान और प्रक्रिया को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। ग्रामीणों के अटूट हौसले और तीखे तेवरों को देखते हुए अधिकारियों को इसे स्थगित करने की घोषणा करनी पड़ी।

विस्थापित नेताओं ने प्रबंधन के खिलाफ उठाई आवाज

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व लातेहार जिला परिषद की उपाध्यक्ष अनीता देवी और विस्थापित नेता शंकर उरांव ने किया। उन्होंने प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाते हुए कहा कि पुनर्वास और भूमि अधिकारों को स्पष्ट किए बिना किसी भी काम को आगे बढ़ने नहीं दिया जाएगा।

इस बैठक में जिले के वरिष्ठ पदाधिकारी अपर समाहर्ता सलमान जफर खिजरी, क्षेत्रीय पदाधिकारी समीर कुमार बडाईक, प्रियंका कुमारी, स्थानीय अंचल अधिकारी बालेश्वर राम, प्रखंड विकास पदाधिकारी सोमा उरांव सहित एनटीपीसी के महाप्रबंधक प्रतीक कुमार सिन्हा, प्रशांत कुमार और एके सक्सेना समेत कई उच्च अधिकारी मौजूद थे।

अरबों टन कोयले का है भंडार, 2028 तक चालू होने का अनुमान

तकनीकी रूप से इस खदान क्षेत्र में कोयले का भारी भंडार मौजूद है। अनुमान के मुताबिक:

  • पूर्वी भाग में लगभग 439 मिलियन टन कोयले का भंडार है, जिसे वाणिज्यिक कोयला नीलामी के सातवें चरण में एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड ने हासिल किया था। इस ओपन-कास्ट माइंस को एनएलसी इंडिया लिमिटेड द्वारा विकसित किया जा रहा है, जिसके 2028 तक पूरी तरह चालू होने की उम्मीद है।
  • पश्चिमी भाग में लगभग 110 मिलियन टन कोयले का भंडार आंका गया है।

फिलहाल, इतने बड़े प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने से पहले स्थानीय स्तर पर कई ग्राम सभाओं ने जमीन के हक और विस्थापन की नीतियों को लेकर मोर्चा खोल रखा है, जिससे कंपनी और रैयतों के बीच खींचतान जारी है।

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