झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: यौन हिंसा मामलों में ज़ीरो एफआईआर अनिवार्य, लापरवाही पर होगी कार्रवाई

झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: यौन हिंसा मामलों में ज़ीरो एफआईआर अनिवार्य, लापरवाही पर होगी कार्रवाई

Johar News Times
4 Min Read

रांची: महिलाओं और यौन हिंसा की पीड़िताओं के अधिकार, सुरक्षा, न्याय और पुनर्वास से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, पुलिस विभाग और संबंधित एजेंसियों को कई अहम निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यौन हिंसा और पॉक्सो सहित किसी भी संज्ञेय अपराध में क्षेत्राधिकार का बहाना बनाकर प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में ज़ीरो एफआईआर दर्ज करना पुलिस की कानूनी जिम्मेदारी है। अदालत ने कहा कि ज़ीरो एफआईआर दर्ज नहीं करना कानून का उल्लंघन है। पुलिस महानिदेशक को बीएनएसएस 2023 की धारा 173 के तहत इसकी व्यवस्था सख्ती से लागू करने, नियमित प्रशिक्षण और संवेदनशीलता कार्यक्रम चलाने का निर्देश दिया गया है।

पीड़ितों के पुनर्वास और सहायता पर विशेष जोर

हाईकोर्ट ने महिला एवं बाल विकास विभाग को राज्यभर के वन-स्टॉप सेंटरों को मजबूत करने और उनकी निगरानी के लिए समिति गठित करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि यौन हिंसा पीड़ितों को तत्काल कानूनी, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

दुष्कर्म पीड़ित बच्चों के लिए शिक्षा और छात्रवृत्ति

अदालत ने प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया है, जो दुष्कर्म से जन्मे बच्चों की शिक्षा और विकास की निगरानी करेंगे। ऐसे बच्चों को बारहवीं तक निःशुल्क शिक्षा दी जाएगी। आईआईटी, एनआईटी, एम्स, आईआईएम जैसे संस्थानों में प्रवेश मिलने पर उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति भी उपलब्ध कराई जाएगी।

हाईकोर्ट के प्रमुख निर्देश

  • यौन अपराध मामलों में ट्रायल की शुरुआत में ही अंतरिम राहत पर निर्णय लिया जाए।
  • अंतिम फैसला चाहे जो हो, पीड़िता के लिए अंतिम मुआवजा तय करना अनिवार्य होगा।
  • मुआवजा राशि 30 दिनों के भीतर भुगतान की जाए।
  • दुष्कर्म मामलों की प्रारंभिक जांच 15 दिनों और अंतिम जांच दो माह के भीतर पूरी की जाए।
  • यौन अपराध मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जाए।
  • पुलिस महानिदेशक विशेष निगरानी दल गठित कर मामलों की नियमित समीक्षा करें।
  • पीड़िता की पहचान गोपनीय रखना अनिवार्य होगा, उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई होगी।
  • सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को तत्काल कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश।
  • पॉक्सो मामलों में 24 घंटे के भीतर आश्रय, सुरक्षा और चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करनी होगी।
  • पीड़ित महिला या बच्ची का बयान महिला पुलिस अधिकारी ही दर्ज करेगी।
  • सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रतिबंधित चिकित्सीय जांच पद्धतियों पर पूर्ण रोक रहेगी।
  • स्कूलों, कॉलेजों और गांवों में कानूनी जागरूकता एवं आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
  • आवश्यकता पड़ने पर पीड़िता और उसके परिवार के पुनर्वास की व्यवस्था सरकार करेगी।
  • महिला हेल्पलाइन 181 को अधिक प्रभावी बनाने तथा उसे आपातकालीन सेवा 112 से जोड़ने पर विचार करने का निर्देश दिया गया है।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यौन हिंसा पीड़ितों को त्वरित न्याय, सम्मानजनक व्यवहार और प्रभावी पुनर्वास उपलब्ध कराना राज्य की जिम्मेदारी है तथा इसमें किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

Share This Article