वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के देशव्यापी और राज्यव्यापी आह्वान पर मंगलवार को घाटशिला अनुमंडल में शिक्षकों का गुस्सा फूट पड़ा। अनुमंडल के विभिन्न वित्त रहित उच्च विद्यालयों और इंटर कॉलेजों में प्रस्तावित ‘स्थापना अनुमति एवं प्रस्वीकृति शर्त एवं बंधेज नियमावली-2026’ के ड्राफ्ट की प्रतियां जलाकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। आंदोलनरत शिक्षकों और कर्मचारियों ने इस नई नियमावली को सीधे तौर पर ‘काला कानून’ करार दिया है। उनका कहना है कि यदि यह ड्राफ्ट इसी रूप में लागू हुआ, तो सालों से चल रहे अधिकांश शिक्षण संस्थानों का वजूद ही खत्म हो जाएगा।
“सरकारी स्कूल के लिए 1 एकड़, हमारे लिए 2 एकड़ क्यों?” – भेदभाव का आरोप
मुसाबनी के जीसीजेडी हाई स्कूल, मुसाबनी माइंस इंटर कॉलेज सहित घाटशिला, चाकुलिया, बहरागोड़ा और पूरे अनुमंडल क्षेत्र के वित्त रहित संस्थानों के शिक्षक और कर्मचारी मुख्य द्वार पर जमा हुए। प्रदर्शनकारियों ने नियमावली के कड़े और अव्यावहारिक नियमों पर सवाल उठाए।
शिक्षकों का आरोप है कि इस ड्राफ्ट में भूमि, सुरक्षा कोष , पुस्तकालय और प्रयोगशाला को लेकर ऐसी शर्तें थोप दी गई हैं, जिन्हें पूरा करना किसी भी वित्त रहित संस्थान के लिए मुमकिन नहीं है। उदाहरण के तौर पर:
- सरकारी विद्यालयों के लिए जहां सिर्फ एक एकड़ भूमि तय की गई है, वहीं वित्त रहित संस्थानों के लिए दो एकड़ भूमि अनिवार्य कर दी गई है।
- सुरक्षा कोष की राशि में भी कई गुना का इजाफा कर दिया गया है, जो पूरी तरह अनुचित है।
30 साल की सेवा का मिला यह सिला?
मोर्चा के नेताओं ने भावुक और आक्रोशित होते हुए कहा कि राज्य के वित्त रहित शिक्षण संस्थान पिछले 25 से 30 सालों से सुदूर ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। इसके बावजूद नई नियमावली में 1000 वर्ग फीट के चार लैब रूम और 1000 वर्ग फीट के लाइब्रेरी जैसी अव्यावहारिक शर्तें जोड़ दी गई हैं। शिक्षकों ने साफ कहा कि यह सरकार की इन संस्थानों को बंद कराने की एक सोची-समझी साजिश है।
1250 से अधिक संस्थानों में प्रदर्शन, सुधार होने तक थमेगा नहीं आंदोलन
मोर्चा के प्रमुख नेताओं में शामिल कुंदन कुमार सिंह, रघुनाथ सिंह, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, चंदेश्वर पाठक, देवनाथ सिंह, अरविंद सिंह, गणेश महतो, फजलुल कादरी अहमद, मनीष कुमार, नरोत्तम सिंह, संजय कुमार, मनोज तिर्की, विनय उरांव, मुरारी प्रसाद सिंह और रेशमा बेक ने संयुक्त रूप से कहा कि आज राज्य के 1250 से अधिक शिक्षण संस्थानों में इस काले मसौदे का विरोध हुआ है। जब तक सरकार इस ड्राफ्ट में सुधार और संशोधन नहीं करती, तब तक यह आंदोलन और तेज होगा ।
