खरसावां। सरायकेला-खरसावां जिले के सीमावर्ती रायजामा और फेचांग टोला के ग्रामीण 600 फीट ऊंची पहाड़ियों में स्थित प्राकृतिक जलस्रोतों से पाइप और बांस के सहारे पेयजल की आपूर्ति कर रहे हैं। सामुदायिक सहयोग से वर्षों से संचालित इस व्यवस्था से गांवों की दैनिक जल जरूरतें पूरी हो रही हैं, हालांकि ग्रामीण स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि रायजामा में दो चापाकल और एक जलमीनार खराब हैं। पहाड़ी जलस्रोतों से पूरे वर्ष पानी मिलता है और ऊंचाई के कारण बिना मोटर-पंप के पानी गांव तक पहुंच जाता है। ग्रामीण स्वयं पाइप और बांस की मरम्मत कर जलापूर्ति बनाए रखते हैं। बरसात के मौसम में पहाड़ियों से आने वाली मिट्टी और गाद के कारण पानी दूषित हो जाता है, जिससे पेयजल संकट गहरा जाता है। वर्ष 2023-24 तक नक्सल प्रभावित रहे इस क्षेत्र में अब विकास की नई उम्मीदें जगी हैं।

खरसावां विधायक दशरथ गागराई ने रायजामा और आसपास के टोलों का दौरा कर प्राकृतिक जलस्रोतों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि जल्द ही पीएचईडी अधिकारियों के साथ संयुक्त निरीक्षण कर प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण, आधुनिक जलापूर्ति व्यवस्था, हर घर नल योजना और जल शोधन की दिशा में पहल की जाएगी, ताकि ग्रामीणों को वर्षभर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके। दौरे के दौरान सोयना सरदार, उपेंद्र सरदार, मेघनाथ सरदार, खुदीराम उगुरसांडी, राम हांसदा, रामेश्वर सरदार, जगन सरदार, सोमा सरदार, लटकन सरदार, सुनित सरदार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
